तुम अगर साथ दो राधा सीता बनो
मैं तुम्हारा किशन राम बन जाऊंगा
तेरे अधरों पे गर नाम मेरा रहे
बाँसुरी बनके दिल मे उतर जाऊंगा

जिंदगी का है पथ मुश्किलों से भरा
चलता हूँ तो मुझे कोशती है धरा
हाँथ में हाँथ दो तुम मेरी अपक्षरा
पथ कठिन हो मैं फिर भी गुजर जाऊँगा
तेरे अधरों पे गर नाम मेरा रहे
बाँसुरी बनके दिल मे उतर जाऊंगा
तुम अगर*******************

था अधूरा तेरे बिन अधूरा हूँ मैं
राधिका के बिना सूना कान्हा हूँ मैं
जैसे सूना है ब्रज साँवरे के बिना
वैसे सूना सा एक ब्रज का ग्वाला हूँ मैं
यमुना तट पे मुझे रोज मिलते रहो
मैं तुम्हारे लिए श्याम बन जाऊंगा
तेरे अधरों पे गर नाम मेरा रहे
बाँसुरी बनके दिल मे उतर जाऊंगा
तुम अगर*******************

इस जहाँ में वफ़ा कोई करता नही
अब किसी के लिए कोई मरता नही
अब जमाने से भी कोई डरता नही
प्यार तो आज का एक ब्यापार है
कृष्ण राधा यहाँ कोई बनता नही
मन के मधुवन में तुम अपना पहरा करो
मैं उसी मन के मधुवन में छुप जाऊंगा
तेरे अधरों पे गर नाम मेरा रहे 
बाँसुरी बनके दिल मे उतर जाऊंगा
तुम अगर******************

✍️✍️आशीष सिंह
Call 112 लखनऊ