मैं भी उड़ु आसमान से असंख्य तारे तोड़कर
मैं लेकर आऊं चंदा मामा से मिलकर
मैं ढेर सारी बातें करके आऊ।
बादलों के बीच बैठे में अठखेलियां के खेलु
उजले काले बादलों आनंद लेकर आऊ।
ऐ बादल बारिश ले आओ सुखे धरती पर वर्षा बरसाओ
धरती है प्यासी अपनी मेघा से प्यास बुझाओ। छोटे-छोटे बच्चे बारिश की बूंदों के लिए मचलते तू अपनी फौहारे बरसा बारिशों के साथ
तू बिजली मत कर कड़कना
तेरा रूद्र रूप देखकर जी मेरा घबराता है
तू मनोहर रूप में ही प्यारी है बारिशों के बूंदे मे मेरे छाते का उड़ जाना मुझे बहुत भाता है।
भीगी भीगी बारिशों में सड़क पर
खुले आसमान के नीचे मुझे
बारिशों में भीग ना बड़ा प्यारा लगता है
तेरा मनोरम दृश्य देखकर
मैं भी बाबली हो जाती हूं
पुराने दिनों की यादों में लौट जाते हूं
बचपन की यादें की याद सताती हैं
स्कूल बैग कंधों पर लटकाएं
बारिश में दोस्तों के संग भीगते हुए आना
उन मस्तियों की याद बहुत सताती हैं
मम्मी की थप्पड़ मीठी-मीठी यादों की यादें बहुत आती हैं।
पकौड़ी की खुशबू मम्मी की हल्दी वाले दूध याद बहुत आती है।
काश मैं फिर से पुराने दिनों में लौट पाती।
ऐ वक्त ठहर जा मुझे फिर से
बचपन कि दुनिया में जाना है
बचपन में पढ़ाई का बोझ
बड़ा सिर दर्दी लगता था
आज जिम्मेदारियों का बोझ
दोबारा बचपन में जाने का दिल करता है
अब बस याद करने के सिवा कुछ नहीं बचा है समय चक्र पर किसी का वश नहीं चला है।
सपना कुमारी बिहार पटना

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