रितेश भैया हड़बड़ाकर ऊपर कमरे मे जाते है देखते है
अवि बहुत रो रहा है काफी देर से रोने के कारण उसके होठ सूख गए थे, आँखे रो रोकर क्षुब्ध हो गई थी।
भैया अवि को दौड़कर अपने गोद मे लेकर कलेजे से लगाते है। उसकी पीठ सहलाते हुए नीचे लेकर आते है।
तब तक मम्मी जी और दीदी भी घर आ गए थे।
मुझे बुत बना हुआ और भैया को मेरे पास बैठा देखकर घर मे नीरवता देखकर मम्मी को कुछ तो अंदेशा हो गया घर मे कुछ तो हुआ है।
मम्मी जी मुझसे ना पूछकर सीधे रितेश भैया के पास जाकर इशारो ही इशारो मे रितेश भैया से पूछती है।
रितेश भैया मम्मी को अवि के लिए दूध बनाने के लिए कहते है साथ ही साथ रसोई घर मे जाने से भी मना करते है।
भैया ,मम्मी की गोद मे अवि को देते है ,रसोई घर मे से इंडक्शन लाकर बाहर दे देते है। बिट्टू दीदी को उनके संग रसोई घर की साफ सफाई करने के लिए कहते है।
मै जब तक सामान्य नहीं हो गई तब तक भैया मुझे समझाते रहे और मेरे पास ही रहे।
रात का खाना मम्मी जी ने बनाया। बिट्टू दी ने सबको खाना खिलाया ,प्रेम जी अपने कमरे मे सो रहे थे।किसी ने भी उनको उठाना उचित नहीं समझा।
मेरे खाने का बिल्कुल भी मन नहीं था। मुझे तो सिर्फ़ रोना ही रोना आ रहा था। भैया ने मनुहार करके ,अवि का वास्ता देकर जबरदस्ती खाना खिला दिया।
घर का वातावरण तनावपूर्ण हो गया था। सबके माथे पर चिंता की लकीर दिख रही थी।
भैया प्रेम जी के फोन से सोनिया का नम्बर लेते है। उसे अपने फोन से कॉल करते हैं और उसे दूसरे दिन कैफे मे ग्यारह बजे मिलने को कहते है।
मुझे भैया अपना ध्यान रखने को और कुछ भी उल्टा पुलटा न करने की हिदायत देकर चले जाते है।
जानते हो देव , पति पत्नी का रिश्ता सबसे नाजुक रिश्ता होता है। और एकबार इस रिश्ते मे शक ,अविश्वास जगह बना लेती है तो रिश्तो मे दरार पैदा हो जाती है।
प्रेम जी सुबह से उठकर मुझसे नजरे चुरा रहे होते है। बार बार मुझे कमरे से आते जाते देख रहे थे ,शायद अपनी सफाई मे कुछ कहना चाहते थे।
उधर भैया सोनिया से मिलते है , अपने आप को प्रेम जी का दोस्त बताते है। "कबसे जानती हो प्रेम को??"
"लेकिन आप मुझसे क्यों पूछ रहे हो??" सोनिया कहती है। "जितना पूछ रहा हूँ" उसका जवाब दो भैया कहते है
सोनिया "अगर ना दू तो।"
भैया "तब जेल जाने की तैयारी कऱो"
सोनिया "क्या मतलब है आपका ,आप कौन है??"
भैया "अगर तुम सीधे तरीके से और सच सच बता दोगी तो तुम्हारा दोस्त वरना पेशे से मै रिपोर्टर हूँ।"
ड्रगस बेचने के जुर्म मे जेल भी भिजवा सकता हूँ। और तुम्हारा नाम बड़े बड़े अक्षरों मे पेपर्स मे छपवा भी सकता हूँ।
सुनकर सोनिया के हाथ पाँव ढीले हो जाते है। माथे से पसीने टपकने लगते है।
भैया फिर क्या सोचा है तुमने "मुझे सीधे तरीके से बताओगी या .....मर्जी तुम्हारी"
यह कहकर भैया दो कप काफी का आर्डर दे देते है।
सोनिया चुपचाप अपने चेयर मे बैठ जाती है। और बताना शुरु करती है।
मै और प्रेम काँलेज से ही एकदूसरे को जानते है।
एक साल पहले की बात है। मै प्रेम से हास्पिटल मे मिली थी। मैअपनी सहेली से मिलने गई थी और प्रेम का बेटा बिमार था। उसी वक्त हमदोनों ने एकदूसरे के नम्बर ले लिए थे। उस वक्त वो बहुत परेशान था। हमारी ज्यादा बातचीत नहीं हुई। जब प्रेम का बेटा इस दुनियां से चला गया वो बहुत दुखी था।
एकदिन मैने उसे फोन किया, उसकी आवाज मे बहुत उदासी झलक रही थी।तब मैंने उसे मिलने बुलाया। वो जिंदगी से बहुत हताश हो रखा था। और वो अपनी जिंदगी की लीला समाप्त करना चाहता था।
मैनै उसे कृत्रिम खुशी देने की कोशिश की और उसे ड्रग्स की एक कश की आँफर की। उसे हल्कापन महसूस हुआ। वह मुझसे रोज ही उसकी माँग करने लगा। मैं उसके चेहरे की मुस्कान को देखते हुए इंकार कर न सकी।
उसे लेकर वो इस तरह से नशे मे डूब जाएगा इसका अंदाजा मुझे भी नहीं था। मै भी लिया करती हूँ ड्रगस लेकिन कभी कभी।
"तुम क्या करती हो" उससे मुझे मतलब नहीं है। लेकिन तुमने एक अच्छे खासे इंसान को बर्बादी की तरफ धकेल दिया है।
भैया - "तुम दोनों का अफेयर कब से चल रहा है??
हँसकर सोनिया कहती है अफेयर "किसने कहा" ??आपसे की मेरा अफेयर चल रहा है"
भैया "देखो ज्यादा मुझसे झूठ बोलने की कोशिश मत करो। मै आखिरी बार कह रहा हूँ सही सही बताओ वरना अंजाम क्या होगा इससे तुम भली भाँति वाकिफ हो।"
सोनिया - "ये क्या तरीका है बात करने का मैंने कहा न मेरा कोई अफेयर नहीं चल रहा है प्रेम के साथ।
हमारी सिर्फ अच्छी जानपहचान है और उससे ज्यादा कुछ नही समझे आप।"
भैया "अच्छा !!! सिर्फ अच्छी जान पहचान मे लोग फोन करके जानू आई लव यू कहते है !!! है न?? तब तो मै भी आपसे ऐसा कह सकता हूँ। क्यों ठीक बोल रहा हूँ न मै??"
सोनिया "देखिये.आप हद से ज्यादा बोल रहे है।"
भैया - "ओ मैडम अभी तो आपने मेरी हद देखी कहाँ है??
सीधे तरीके से जो पूछ रहा हूँ वो बताईये।"
सोनिया - "असल मे प्रेम ने मुझे ड्रग्स के लिए फोन किया था। मै अपने पति को फोन लगा रही थी भूल से प्रेम को फोन लग गया। मैनै फोन उठाने वाले को मौका दिया ही नहीं और अपने शुरु हो गई बोलना। जब सामने से किसी लेडीज की आवाज आई तब मै समझ गई की रांँग नम्बर ले गया है। लेडीज की आवाज सुनकर एक बार तो मै भी डर गई थी मेरे पति का फोन किसी लेडीज के पास कैसे है?? लेकिन जब नम्बर देखा तो समझ गई की प्रेम की तो आज वाट लग गई।"
भैया ताली बजाकर कहते है "कहानी तो अच्छी बना लेती हो।"
सोनिया "जो सच था मैनै बता दिया। आपको मानना है तो मानिये वरना आपकी मर्जी।"
भैया "फोन दीजिये अपना।"
सोनिया "लेकिन क्यो ??"
भैया उसके हाथ से फोन छीनकर उसमे से सीम निकाल लेते है और उसे वार्निग देता है आइंदा से अगर आपने प्रेम से कांटेक्ट करने की कोशिश की या उसे ड्रग्स दिया तो आप सोच लिजियेगा अपना अंजाम।
सोनिया की फोन की सीम को उसी के सामने भैया तोड़कर बहती नाली मे फेंक देते है।
मुझे फोन करके सारी बात बताते है और प्रेम जी से शांति से बात करने को कहते है।
मै प्रेम जी को चाय नाश्ता देकर जाने लगती हूँ। जैसे ही मै जाने के लिए मुड़ी उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली।
मैने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन वो उठकर मेरे सामने आकर खड़े हो गए। और अपने दोनो हाथो से मेरे चेहरे को उठाकर कहने लगे प्रिति मेरी तरफ एक बार नजरे उठाकर तो देखो, मुझे अपनी सफाई मे कहने का एक मौका तो दो क्या एक दिन मे इतना बुरा लगने लग गया??
उनके दोनो हाथो को झटकते हुए ,क्या सुनु मै आपको?? अपनी आँखों से देख लिया ,सुन लिया और क्या सुनना बाकी रह गया। बोलिऐ??
प्रिति जो तुमने देखा वो सच था मगर जो सुना वो झूठ था। मै नहीं जानता उसने फोन मे ऐसा क्यो कहा।
प्रेम जी वही सब बाते बताते है जो सोनिया ने भैया से कहा।
मुझे गले लगाकर कहते है मेरी बीवी तो इतनी सुंदर और प्यारी है और मुझसे इतना प्रेम करती है। मै अपनी प्रियतमा को छोड़कर भला कहाँ जाऊँगा??
हाँ मै मानता हूँ मुझे नशा नहीं करना चाहिए था। मै तुम्हारी कसम खाकर कहता हूँ की मै छोड़ दूँगा। मेरा विश्वास करो प्लीज कहकर मेरा हाथ पकड़कर रोने लगते है।
मै उनके ठुड्डी को उठाकर आँखो मे आँखे मिलाकर उनसे कहती हूँ आप सच कह रहे हो ??आप छोड़ देंगे न नशा करना।
उन्होंने आँखो ही आँखो से हामी भरा। मेरे दोनो गालो को चूमकर गले लगा लिया।
मुझे माफ कर दो प्रिति .....माफ कर दो।
क्रमशः

0 टिप्पणियाँ