वहांँ पर बैठी सोनिया मैम देखकर हंँसने लग जाती है कहती है हर काम हर किसी के बस का नहीं होता है।
प्रिति सोनिया को आंँखें तरेर कर देखती है, मगर कुछ कहती नहीं , थोड़ी देर स्क्रीन पर फाईलों को आगे पीछे करके देखती है । देव से कहती है बाद में आती हूँ कह कर उठकर चली जाती है।

स्कूल की छुट्टी के बाद प्रिति "देव से पूछती है आप सुबह कितने बजे स्कूल आते है"

देव  " मै 7बजे आ जाता हूँ ,कभी कभार देर भी हो जाती है। लेकिन क्यों पूछ रही है आप??"

प्रिति  "मै ...वो मै कह रही थी आपसे ...अगर आपको कोई दिक्कत नही है तो कल से मै भी सात बजे आ जाया करूँगी "

देव   "जानने की उत्सुकता से पूछता है क्यों??"

प्रिति "मुझे कंम्यूटर तो चलाना आता है मगर काफी साल हो गए है शादी से पहले सिखा था , अगर आप मुझे एकबार फिर से सिखा देते तो अच्छा रहता।
स्कूल की फाईल कैसे मैंटेन करते है कैसे उसमे 
प्रोग्रामींग किया जाता है , वगैरह वगैरह..."

देव  "अच्छा..ये तो अच्छी बात है आपको पहले से आता है, तो ज्यादा समय भी नहीं लगेगा आशा है आप जल्द ही समझ जाएंँगी .....ये तो मेरा सौभाग्य है ..जरूर आ जाईयेगा..मै भी वक्त पर आ जाऊँगा।"
दोनो बाते करके ,अपने अपने घर चले जाते है।

प्रिति दूसरे दिन सुबह सात बजे स्कूल पहुंँच जाती है और.साथ मे देव भी। क्लासेज शुरु होने से पहले 
एक घंटा रोज प्रिति देव से सिख लिया करती। सभी शिक्षको के आने से पहले  स्टाफ रुम मे चली जाती।

धीरे धीरे वक्त बीतता गया..लेकिन प्रिति ने हार नहीं मानी ,काफी थक जाती थी ,घर का सारा काम करते करते। रोज रात को लेट से सोना ,अवि की देखभाल करना , सुबह चार बजे उठना .. घर मे सभी अपने आप मस्त रहते थे। मगर सही मायने मे, घर मे कोई भी ऐसा नही था जिसको प्रिति की परवाह थी। प्रिति खुद को भी भूल गई थी। जब बहुत थक जाती तो खुद को ही मारने लगती मगर किसी से भी एक लफ्ज़ नहीं कहती थी।

इस तरह एक महीने मे प्रिति देव से कंँम्प्यूटर के सारे फंँक्शन  सीख लेती है।वक्त के साथ.इन दोनो की दोस्ती भी गहरी होती जाती है।

एक महीने के बाद प्रिति आँफिस स्कूल टाईमिंग मे सीधे आँफिस जाती है। वहाँ सोनिया मैम भी रहती है।

सोनिया मैम -  "शुप्रभात प्रिति जी" आज आप सुबह सुबह आँफिस कुछ काम था क्या आपको??"

प्रिति - "शुप्रभात सोनिया जी" ..जी" 

तभी एक बच्चे के पापा फीस देने आ जाते है। प्रिति 
उनसे फीस लेती है कम्प्यूटर मे एन्ट्री करती है। फीस बुक मे साईन करके उनको फी बुक रीटर्न  देती है। और उनको स्कूल के रिगार्डींग जो भी इनफार्मेशन चाहिए होती है बहुत ही धैर्यपूर्वक और विनम्रता से समझाती है।

सोनिया मैम हतप्रत होकर बिना पलके झपकाए प्रिति का चेहरा  देखती रह जाती है , उसे समझ मे नही आ रहा था ,आखिर हो क्या रहा है।

उधर आँफिस मे पीछे से देव भी आकर सोनिया मैम का चेहरा देखकर उसे भी बहुत जोर से हँसी आ रही होती है ।

मगर वह मुहँ दबाकर खड़ा खड़ा हँसता है।

सोनिया "वाह प्रिति जी आपने तो कमाल कर दिया 
हकलाकर कहती मतलब आपने कब , कैसै सीखा
मैंने तो आपको आँफिस मे कभी नहीं देखा 
उस दिन के बाद आज ही देखा।"

सोनिया एक साँस मे प्रिति से सवाल पे सवाल पूछती जाती है।

प्रिति -  "रिलेक्स सोनिया जी ..एक गिलास मे पानी डालकर सोनिया को पीने को देती है।"


फिर प्रिति सोनिया से कहती है "वो क्या है न सोनिया जी आपने एक कहावत तो सुनी होंगी ही .".जहाँ चाह वही राह है" ..मुझमे सीखने का जूनून था , कब ,कैसे किससे सीखा इससें क्या फर्क  पड़ता है ,इसलिए कभी भी किसी का भी उपहास नहीं करना चाहिये।"

इतना कहकर प्रिति देव से कहती है "मेरी दो पीरियड 
हिंदी की क्लासेज है वो लेकर फिर मै आफिस मे आ
जाऊँगी।"

यह कहकर वो अपनी चेयर से उठकर एक नजर सोनिया पर डालकर चली जाती है।

सोनिया प्रिति को जाते हुए चुपचाप देखती है।

प्रिति स्टाफ रुम मे जाकर शालिनी से मिलती है।
दोनो एकदूसरे से बाते कर रही होती है , तभी प्रिति को हल्का सा चक्कर आने लगता है। 

शालिनी  " क्या हुआ प्रिति तुम्हें??"
प्रिति -  "कुछ नहीं ,हल्का चक्कर आ रहा है"

शालिनी प्रिति को  डाँटते हुए कहती है खाने पीने मे ध्यान नहीं दिया होगा , जानती.हूँ आज भी भूखी पेट आई होगी स्कूल।

प्रिति  "हम्म ..क्या करू मै ,सुबह सुबह मुझे खाना अच्छा नहीं लगता है।"
"जरूर मेरा बी पी लो हो गया होगा।"

शालिनी  "अच्छा मैडम को ये भी पता है .।।चल कैंटीन
चलने सकेगी तो,."
प्रिति  "हम्म"

शालिनी - " प्रिति को कैंटीन लेजाकर नमक चीनी.का पानी पीने देती है और कहती है तुम स्टाफ रुम मे आराम करो तेरे बदले आज  मै क्लासेस ले लेती हूँ ,अभी मै फ्री हूंँ  समझी।"

प्रिति  - "तुम क्यों परेशान हो रही.हो ..मै ले लूँगी अपनी क्लासेस ..अभी तो तुम्हें आराम की मुझसे ज्यादा जरूरत है। तुम प्रेग्नेंट हो ..।क्यों निहायत मेरी वजह से परेशान होती हो।"

शालिनी -  "मुझे कोई आराम की जरुरत नही है  तुमसे ज्यादा फिट हूँ मै , और जब मुझे तुम्हारी जरूरत होगी तो बेधड़क कहकर करवालूँगी।"

प्रिति - "तुम मानोगी तो हो नहीं ..जिद्दी जो है ..ठीक है तुम ले लो ,लेकिन जरा सी भी प्राब्लम होगी तो मुझे बुला लेना।"

शालिनी -  " हँसते हुए कहती है ,"ओके बाबा"

प्रिति -  "चले"

शालिनी -  "कहाँ चली मैडम .कुछ खा तो लो थोड़ा"

प्रिति -  "लंँच टाईम मे खाएंँगे , साथ मे तीनो।"
शालिनी - चलो चले 

शालिनी प्रिति के बदले क्लासेस लेने चली जाती है। प्रिति स्टाफ रूम मे आराम करने।

शालिनी अपनी और प्रिति के बदले क्लासेस लेकर लंँच टाईम मे स्टाफ रुम मे जाती है,  देखती.है प्रिति सोई हुई है टेबल पर सर रखकर।

प्रिति के बगल के चैयर पर बैठकर बड़े प्यार से शालिनी प्रिति का चेहरा देखती है ,शांत उदास , चिंता ग्रस्त चेहरा ऐसा लग रहा था मानो वो नींद मे भी चिंतन कर रही हो , चेहरे पर अलग अलग आते जाते भावो को देख रही थी, सोच रही थी क्या परेशानी है इसे बताती भी तो नहीं , अगर मै ना हँसाऊ तो ये हँसती भी नही.है। मैंने कभी भी इसके पति को भी नहीं देखा , कुछ भी पूछो तो टाल जाती है।

तब.तक मै प्रिति हिलने डुलने लग जाती है वो आँख खोलकर देखती है तो सामने मे शालिनी बैठी हुई मिली..

प्रिति."उठते ही बोलने लगी तू कब आई..मुझे क्यों नहीं उठाया .।"

शालिनी  "तू इतनी गहरी नींद मे सो रही थी तुझे उठाने का मन ही नहीं हुआ।"

प्रिति शालिनी से कहती है "चलो उठो देव इंँतजार कर रहा होगा हमारा कैंटीन मे। मै टिफिन निकाल लेती हूँ तेरी मेरी.."

दोनो सहेलीयाँ कैंटीन जाती है , वहाँ देव बैठकर इंँतजार कर रहा होता है।


क्रमशः................