थकना जीवन का पर्याय नहीं
नहीं कोई राही उन्मुक्त यहां
सभी को निज धर्म निभाना है।
ईंसान बनाया ईश ने!!
सब शक्ति संजोये हम
प्रभु का वरदान हैं।
नीङ का निर्माण करते
कभी न पंछी घबराते हैं!!
कर घोंसलों का निर्माण
फिर नई दिशा को उङ जाते हैं~
सब अपने कर्म की लकीरें खींच
अनन्त गगन में खो जाते हैं।
✍डाॅ पल्लवी कुमारी"पाम

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