कहते हैं,जब किसी व्यक्ति की असामयिक मृत्यु हो जाती है ,और उसकी कोई इच्छा अधूरी रह जाए ,तो वह अतृप्त हो भटका करती है।
उसे तब तक चैन नहीं आता ,जब तक वह अपना मकसद पूरा नहीं कर लेती।
ये आत्माएं दुखी,बदला लेने वाली,बुरा चाहने वाली भी हो सकती हैं।
लेकिन इससे उलट कुछ आत्माएं ,लोगों की मदद भी करती हैं।
अच्छी रूह की सत्य घटना पर आधारित एक कहानी है ,बुलेट बाबा की।
बुलेट बाबा ,ये सुनने में कुछ अटपटा लगता है ,लेकिन है सच।राजस्थान में पाली जिले में,जोधपुर _पाली हाईवे, पर एक मंदिर है ,जहां देवता की मूर्ति नहीं , बल्कि एक व्यक्ति की फूल माला वाली फोटो और एक बुलेट रखी है ,उसकी ही पूजा की जाती है।आसपास प्रसाद ,फूल माला की कई दुकानें गुलजार दिखती हैं।
कहते हैं,यह दुर्घटना बाहुल्य स्थान है, यहां बहुत दुर्घटना होती थी,लेकिन कोई अदृश्य रूह की वजह से उस स्थान पर गाड़ियों की रफ्तार खुद ब खुद कम हो जाती है,कभी कभी तो एक पुरुष ही आकर दुर्घटना से बचा लेता है।
कौन था ये व्यक्ति किसकी रूह इस स्थान पर अपने बुलेट के साथ मौजूद है?
लोगों की इतनी आस्था क्यों है इस स्थान के बारे में?
यहां के लोगों का मानना है मानना क्या !लोगों ने ये चमत्कार अपनी आंखों से देखा है।
1991की बात है,वहीं पास के गांव चोटिला में जोग सिंह ठाकुर के पुत्र ओम सिंह राठौर अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से रात को गांव लौट रहे थे ,तो इसी जगह हाईवे पर उनकी दर्दनाक दुर्घटना हो गई ,जिससे उनकी तत्काल मृत्यु हो गई।
कहते हैं ,की दुर्घटना के बाद बुलेट को पुलिस थाने ले आई ,लेकिन बुलेट थाने से गायब हो ,उसी दुर्घटना वाली जगह पर पहुंच गई,पहले तो इसे किसी की शरारत समझा गया ,लेकिन बाद में इसे जंजीर से जकड़ा गया,इतना तक की बुलेट से पेट्रोल निकाल उसे थाने में खड़ा करने पर भी ,बुलेट गायब हो घटनास्थल पर ही मिलती।
यह खबर चारो तरफ फैल गई ,तब गांव वालों ने घटनास्थल पर एक चबूतरा बनवाया और वहां ओम राठौर की फोटो रख दी,और वहीं पेड़ के नीचे उनकी मोटरसाइकिल रखवा दी।
ये उस रूह का ही असर था , कि अक्सर उस जगह पर होने वाली दुर्घटना ,अब नहीं होती ।ट्रक चालक ,या कोई भी वाहन वाला , उतर पहले वहां मंदिर में पूजा अर्चना कर ही आगे बढ़ता है।

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