हां! कुछ दिनो से बीमार हूं मै,
मुझे बीमारी है मिल-जुलकर रहने की,
सच्चाई का साथ देने की,गलत का विरोध करने की,
इसलिए सब कहने लगे है कि बहुत बीमार हूं मै!
ना गलत किया है साथ किसी के,ना गलत होने देने की कोशिश करती हूं,
खुश रहूं खुद और बांटू खुशियां औरो मे भी,कोशिश यही रोज मै करती हूं!
नही पसंद जिनको बात ये मेरी, वो कहने लगे है कि बहुत बीमार हूं मै!
थक चुकी हूं अब तो सह सहकर भी,फिर भी हर विकट परिस्थिति के लिए तैयार हूं मै,
कहते है तो कहते रहे लोग, कि बहुत बीमार हूं मै!
ऊपर वाले से नजरे मिलानी है,नही खुद को उसकी नजरो मे गिराना है,
बस वो कह दे एक बार कि जैसी भी हूं उसको तो स्वीकार हूं मै!
श्वेता अरोडा

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