वो बहुत बहुत बिजी रहता है,
जब भी मैं पूछुं तो यही कहता है,
जमाने के लिए बहुत व्यस्त हूँ मैं,
पर तेरे लिए मुझे जमाने भर की फुर्सत है,
तुझसे बढ़कर न कोई काम मुझे,
तू मेरे जज्बों की वो जरूरत है।
बस उसका यही कहना मेरी नजरों में,
उसे खुद बना देता है।
मेरे रिसते घावों पर मरहम लगा देता है।
उसका यह कहना, आम सी अंजू को,
बहुत स्पेशल हो ,
यह एहसास दिला देता है।
और मेरे दिल के घरौंदे में उसकी
मोहब्बत के उजाले को और फैला देता है।
बस तभी तो यह रिश्ता सबसे खास होता है,
बहुत दूर होकर भी वो मेरी रूह के साथ होता है,
मेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर जाता है,
इसीलिए तो विनय , मुझे खुदा से ज्यादा भाते हैं
क्योंकि उनका प्यार मुझसे बिना कुछ मांगे,
बेशर्त चाहें जाता है।
हर हाल में हर सूरत में वो अकेले ढल जाते हैं,
कभी माँ सा प्यार, पापा सी परवाह, भाई सी सुरक्षा,
दोस्त सा समर्पण, प्रेमी सा प्यार, रूठने पर वो मनाने का अंदाज , वो गुरु सा ज्ञान हर समस्या का समाधान जिसकी वाहों में मेरे तीनों जहान से यह दिल सुकून पाता है।
मेरा मन तब अपने भाग्य पर बहुत इतराता है,
है खुशनशीब अंजू,
जो ऐसा साजन से जोड़ा
पापा ने उसका नाता है।
किसी की नजर न लगे मेरे ,
प्यारे से इस प्यार को,
ईश्वर तेरे चरणों में दिल यही,
अरदास लगाता है।
पति होने से पहले वो और बहुत कुछ बन जाता है।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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