जीवन की आस में जीना भूल गए 
हाय कैसे नादान थे हम 
उलझनों में खिलखिलाना भूल गए।

हंसता गाता मुस्कुराता जीवन
ख्वाब ख्वाब संजोए जीवन
हम खोज रहे हर पल जीवन 
है आस पास फिर भी छूना भूल गए ।

बच्चों के उन्माद में जीवन
तेरी मेरी याद में जीवन
सीधी सच्ची हर बात में आनंद भूल गए।

नीम केर बैरी के स्वाद में जीवन
आम जामुन की सुगंध को
ब्रेड और  पास्ता के चक्कर में भूल गए।

बैलों की रुनझुन घंटियों में जीवन
होता था खेतों में  सुहाना जीवन
कार,  मोटर, दिखावे की दुनिया में
स्वास्थ्य को जीना भूल गए।

जाने कैसा यह दौर आया
बात की हर बात में जीवन जीना भूल गए
आई थे  तरक्की करने इस सदी में हम
जीवन की हर बात हर गाथा भूल गए।