पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अजय और शिवानी बर्फ़ीले तूफान में फस जाते हैं,अब आगे-

वर्तमान समय-अब दादाजी कहते हैं जो अब शिवानी और मेरे साथ होने वाला था वो समय हर प्यार करने वालों के लिए सबसे कठिन समय होता है!ये कहते-२ दादाजी फिर से शिमला की यादों में खो जाते हैं!


फ्लैशबैक-अजय और शिवानी दोनों गाड़ी में बैठकर वापिस शिमला की ओर आ रहे हैं और दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी है!अजय उस खामोशी को तोड़ते हुए कहता है शिवानी चिंता मत करो मैं हूँ ना तुम्हारे साथ!


शिवानी बस इतना ही कह पाती है, जी!

अजय अब गाड़ी बिल्कुल घर के दरवाजे के आगे ही रोकता है,जिससे किसीको ये पता ना चल पाए कि शिवानी इसी गाड़ी में से उतरी है!बहुत ज्यादा सर्दी होने की वजह से बाहर ज्यादा भीड़ भी नही थी!

शिवानी और अजय एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर अंदर आए और देखा कि शिवानी के पापा उसके इंतेजार में बेचैनी के साथ हॉल में इधर से उधर घूम रहे थे!उन दोनों को  एक साथ देख कर शिवानी के पापा का खुद पर नियंत्रण  नही रहा और वो गुस्से में चिल्लाते है अजय हाथ छोड़ मेरी बेटी का!

शिवानी आज पहली बार अपने पापा को चिल्लाते हुए देख रही थी क्योंकि डॉक्टर होने की वजह से वो सभी से बहुत धीरे और तमीज के दायरे में ही बात करते थे!शिवानी तो उनकी हद से ज्यादा लाडली बिटिया थी इसीलिए उससे कभी गुस्से में बात तक नही की थी उसके पापा ने!


लेकिन अजय अभी भी शिवानी का हाथ नही छोड़ता तो शिवानी के पापा आगे आकर एक ही झटके में दोनों के  हाथ एक -दूसरे से अलग कर देते हैं और उसे कॉलर से पकड़ लेते है!अब वो गुस्से में अजय से कहते है तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बेटी को हाथ लगाने की?

जयप्रकाश की आवाज सुनकर शिवानी की माँ और अर्जुन भी बाहर आ जाते हैं और शिवानी की माँ जबरदस्ती जयप्रकाश को अजय से अलग करती है और कहती है जो बात करनी है आराम से कीजिये!ऐसे चिल्लाकर बात करेंगे तो सभी पड़ोस वालों को पता चल जाएगा कि हमारी शिवानी रात भर किसी लड़के के साथ थी!

अब ये बात सुनकर जयप्रकाश की आँखे भर आती है और वो कहते हैं मैंने कभी शिवानी और अर्जुन में कोई फर्क नही रखा,हमेशा इसे अपना बेटा माना!जहाँ पड़ोस की सभी लड़कियाँ इस उम्र में सिलाई-कढ़ाई  सीख रही हैं,वहीं मैंने इसे कॉलेज जाने की इजाजत दी और इसने मेरे उस प्यार का आज ये सिला दिया!

तभी शिवानी हिम्मत करके आगे आती है और जयप्रकाश का हाथ पकड़ कर कहती है पापा मेरा भरोसा कीजिये मैंने ऐसा कोई काम नही किया है जिससे आपको शर्मिंदा होना पड़े!

अजय भी अब आगे आता है और कहता है अंकल ये सही है कि ये कल मेरे साथ थी लेकिन मजबूरी में हमे रात को रुकना पड़ा!आप मेरा यकीन मानिए आपकी बेटी ने कोई ऐसा काम नही किया जिससे आपका सिर झुके!

अब जयप्रकाश निढाल से होकर रोते हुए वहीं सौफे पर बैठ जाते हैं कि तभी शिवानी की माँ आगे आती है और कहती है एक बार आप बच्चों की बात तो सुन लीजिये!


अब अजय बताता है अंकल मैं और शिवानी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और कल वो सिर्फ मुझे कुफरी दिखाने गई थी!हम नही जानते थे कि तूफान आ जाएगा और हम वहीं फस जाएँगे!

शिवानी भी अब कहती है हाँ पापा मैं अजय से बहुत प्यार करती हूँ और अब इनके बिना जीने की कल्पना भी नही कर सकती!

जिसके साथ तुम जीवन बिताने के ख्वाब देख रही हो,उसे जानते हुए तुम्हे दिन ही कितने हुए हैं अभी?क्या जानती हो इसके बारे में?बोलो शिवानी बेटा?जयप्रकाश पूछते हैं!

पापा जिसने पूरी इज्जत और सम्मान के साथ मेरे साथ रात बिताई वो इंसान कभी गलत नही हो सकता है!जिस इंसान के  चरित्र को मैं जान गई तो ओर क्या जानूँ उसके बारे में?

तुम पागल हो शिवानी,जयप्रकाश कहते हैं!कुछ नही समझ रही हो!अगर मैं मान भी लूँ कि अजय तुम्हारे लिए सही लड़का है,तब भी तुम दोनों की शादी नही हो सकती!

नही अंकल प्लीज ऐसा मत कहिये,मुझे बस शिवानी दे दीजिए और मुझे अपने जीवन में कुछ नही चाहिए!

अब जयप्रकाश उन दोनों के प्यार को समझ पा रहे थे और वो परेशान होकर कहते हैं बेटा दे देता अगर शिवानी पर सिर्फ मेरा हक होता?

क्या...ये क्या कह रहे हैं आप अंकल?अजय जयप्रकाश से पूछता है!

हाँ बेटा,यही सच है कि शिवानी जब चार साल की थी तभी उसकी शादी मेरे दोस्त के बेटे से हो गई थी!अब हम दोनों दोस्त इन दोनों का 18साल का होने का इन्तेजार कर रहे थे!अभी कुछ समय पहले ही ये 18 की हुई है तो क्या पता वो कब अपनी बहू को लेने आ जाए?जयप्रकाश अब अजय को शिवानी की शादी का सारा सच बताते हैं जिससे शिवानी को सदमा लगता है!
(उस समय में बालविवाह एक रिवाज हुआ करता था)

शिवानी अब गुस्से में कहती है,पापा आप मेरे साथ इतना बड़ा अन्याय कैसे कर सकते हो?मैं तो हमेशा यही सोचती रही कि मेरे पापा दुनिया के सबसे प्यारे पापा हैं जो मेरी हर ख्वाहिश पूरी कर रहे हैं!आपने मेरी जिंदगी के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ क्यों किया पापा?बोलो पापा चुप मत रहो!ये कहकर शिवानी वहीं जयप्रकाश के पैरों में बैठ जाती है और   बिलख-२ कर रोने लगती है!

अजय को इस बात से ऐसा सदमा लगता है कि वो खामोश सा वहीं खड़ा रहता है और शिवानी को लगातार देखे ही जा रहा है!आज शिवानी उसे एक खूबसूरत ख्वाब की तरह लग रही थी!वो चाहता था शिवानी को चुरा कर ले जाए अपनी दुनिया में लेकिन उसके संस्कार उसे ऐसा करने से रोक रहे थे!

अब जयप्रकाश कहते हैं बेटा तेरे ससुराल वाले तुझसे बहुत प्यार करते हैं और मेरी तरह  वो भी यही  चाहते थे कि तुम पढ़ो-लिखो!यहाँ तक कि उन्होंने मुझे कभी तुम्हारी कॉलेज की फीस तक नही भरने दी!वो कहते हैं शिवानी हमारी बेटी है और उसका  सारा खर्चा भी हम ही उठाएँगे!जबसे तुम कॉलेज जाने लगी हो वो ही तुम्हारा खर्चा उठा रहे हैं सारा!उनकी सोच भी मेरी तरह यही थी कि तुम पढ़ो-लिखो!

अब शिवानी जयप्रकाश से पूछती है लेकिन पापा आपका वो कौनसा दोस्त है?

जयप्रकाश अब उसे कहता है वही जिसे तुम बचपन से सोमू अंकल कहती हो!

पापा आप अपने दोस्त सोमवीर के बेटे विशाल की बात कर रहे हो क्या?शिवानी अब सब जान चुकी थी लेकिन इस सच्चाई ने उसके और अजय के सच्चे प्यार को खत्म कर दिया था!

अब अजय बिना कुछ कहे बाहर आ रहा था कि तभी शिवानी उसे जाते हुए देख लेती है और दौड़ते हुए जाकर उसके गले लग जाती है!अब शिवानी उसे रोते हुए कहती है अजय मैं तुम्हारे बिना कैसे जी पाऊँगी?

अजय कहता है जैसे मैं जियूँगा तुम्हारे बिना!अब अजय उसे खुद से अलग करके उसका हाथ पकड़ कर जयप्रकाश के पास जाता है और उन्हें सौंप कर कहता है ये लीजिये अपनी अमानत!अगर अपने इस बेटे पर थोड़ा सा भी भरोसा हो तो तो सिर्फ 15मिनट के लिए इसे मुझसे मिलने मॉलरोड की अदरक वाली चाय की दुकान पर भेज देना सुबह 10बजे!उन 15 मिनट को साथ लिए मैं कल ही वापिस चला जाऊँगा हमेशा के लिए!प्लीज अंकल अपने बेटे पर इतना एहसान कर देना!ये कहकर अजय वहाँ से चला जाता है और होटल में जाकर सारा दिन बस शिवानी के बारे में सोच-२ कर रोता रहता है!

उसके दोस्त सारी बात जानकर उसे तसल्ली देते हैं और सारी पैकिंग कर लेते हैं वापिस जाने की!

अगला दिन- शिवानी सुबह तैयार होकर अपने पापा से कहती है पापा सिर्फ ये 15मिनट मुझे दे दीजिए!मैं वादा करती हूँ वापिस आ जाऊँगी और आपके भरोसे को कभी नही टूटने दूँगी!

जयप्रकाश को आज इस बालविवाह जैसी कुप्रथा का बहुत पछतावा होता है!आज उसे महसूस होता है कि वो खुद ही अपनी बेटी के हर दुख का जिम्मेदार है,लेकिन अब वो चाह कर भी कुछ नही कर सकता था!वो उसे आखिरी बार अजय से मिलने की इजाजत दे देता है!

दूसरी ओर,अजय शिवानी का उसी अदरक वाली चाय की दुकान में बैठा इन्तेजार कर रहा है!शिवानी आकर खामोश सी उसके सामने बैठ जाती है!बाहर हल्की-२ बर्फ गिर रही है कि तभी चाय वाला रेडियो लगा देता है,जिसपर इत्तेफाक से ऐसा गाना बजने लगता है जो उन दोनों की ही आँखों में आँसू ले आता है-

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों

ये गाना सुनते ही दोनों की आँखों से आँसू बहने लगते है!अब आज दोनों एक-दूसरे से आखिरी बार मिलते हैं और शिवानी उसे कहती है कि शिमला की सारी यादें यहीं छोड़ जाना और एक नई जिंदगी शुरू करना!

अब अजय कहता है मैं तो तुम्हे ये भी नही कह सकता कि शिमला की यादों से बाहर निकल जाना क्योंकि मैं जानता हूँ कि तुम्हे शिमला के हर कोने में मेरी याद आएगी!इस तरह दोनों एक-दूसरे के गले लगते हैं और अदरक वाली चाय भी पीते हैं!

अब अजय के दोस्त गाड़ी लेकर आ जाते हैं और हॉर्न बजा देते हैं और अजय शिमला से उन हसीन पलों को लिए चला जाता है!शिवानी उसकी गाड़ी को दूर तक जाती देखती रहती है!

वर्तमान समय-सभी की आँखों से आँसू बह रहे थे और सबसे ज्यादा दादाजी(अजय) की आँखों से!

अब निखिल उन्हें गुस्से में कहता है क्या दादू मैं नही बात करता आपसे,आप उसे छोड़ कर क्यों आए?लेकर क्यों नही आए!कैसे उस बेचारी ने अपनी सारी जिंदगी आपके बगैर काटी होगी?ये कहकर निखिल उठ कर जाने लगता है कि तभी दादाजी उसका हाथ पकड़ कर कहते हैं कहाँ जा रहे हो निखिल बेटा?अभी तो शिमला की वो प्रेम कहानी तुमने अधूरी सुनी है,पहले इस कहानी का अंत तो जानलो!

नोट-उस समय मे बालविवाह जैसी कुप्रथा आम हुआ करती थी,जिस वजह से बहुत से लड़के और लड़कियों को ना चाहते हुए भी एक ऐसे बन्धन में बंधना पड़ता था,जो वो नही चाहते थे!

अगला और अंतिम भाग -कल

ॐ नमःशिवाय
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