नारंगी सी चुन्नर ओढ़े देखों
किरणें आई है,
मधुर मधुर गुंजन लिए खग 
ने सहनाई बजाई है
बिछ गई है हरी कालिन
उस पर ओश लगे मानों
मोती की हार सजाई  है
रंग बिरंगी पुष्पों ने रंगों
की बहार लाई है
नाच रही है तितलियां प्यारी
लगता है प्रकृति दुल्हन बन
आई है,झर झर झर के तानों
से नीर ने भी संगीत बजाई हैं
मीठे मीठे फलों से प्रकृति 
मां स्वरुप बच्चों की भूख मिटाई है,
चीर कर सीना अब फसल लहलहाने की बारी आई है
देखों प्रकृति ने सांसों में आक्सीजन
भर हम पर जीवन बरसाई है
रुक जाओ इसे ना काटो
मां स्वरूपा प्रकृति ने हम
सब पर ममता बरसाई है।।

प्रिया ❤️✍️