हर तरफ है मारामारी
कहीं दवा कहीं ऑक्सीजन की
पल पल साँसे टूट रही है
अपनों की अपनों के आगे !
कितने टूटे कितने बेबस
चाहकर भी कुछ कर ना पाएं
देखो लाचारी दुनिया की
नतमस्तक किस्मत के आगे !!
--- सतीश निर्दोष
रेवाड़ी (हरियाणा )
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