फेरे ले लिए हैं रूह ने और के संग
घर में अब हो रही तैयारी वलीमें की

किस्मत चल चुकी है दांव अपना
अब बारी मेरी है चाल चलने की

उठकर चल दिये हैं सब अपने घर को
अब तैयारी हमारी है महफ़िल से जाने की

तुझसे दूर होके इतनी मौतें मर चुका हूं मैं
अब ख़्वाइस बची नहीं है जीने की

फूलों कलियों तितलियों में उलझ के रह गए हैं लोग
किसी ने देखी नहीं मुस्कुराहट उसके गालों की
        ---दीपक कुमार