कभी न था ऐसा अनुमान!
सुनाएगी प्रकृति फरमान
यूँ ही छोड़ते हैं वृक्ष
जिस प्राणवायु को..
मारा मारा फिर रहा इंसान
अंधाधुंध काटा..
नरवाई में जलाया..
आज उसी के लिए
पड रहे हैं लाले..
समय रहते चेत
पाँच पेड़ लगा ले।
मालिक समझ बैठा
तू तो एक कठपुतली है।
एक झटके में सबक सिखाया
फिर भी रहा नादान..
अब तो संभल इंसान!!
अब तो संभल इंसान!!
-कीर्ति प्रदीप वर्मा

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