पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अजय शिवानी और सभी से विदा लेकर और शिवानी से अगले दिन का वादा लेकर होटल अपने दोस्तों के पास चला जाता है,अब आगे-

अजय आराम से रजाई में बैठा हुआ है कि तभी उसका दूसरा दोस्त पंकज कहता है अजय तू अब वापिस आया है इतनी रात को 11 बजे,तू अभी तक था कहाँ?

अजय खुद में ही खोया हुआ कहता है यार बस अदरक वाली चाय पी रहा था,शिमला की उस अदरक वाली चाय ने मुझे आने ही नही दिया!

तभी हैरान होकर अनिल पूछता है लेकिन तू कबसे चाय पीने लगा?

जबसे शिमला में आया हूँ,तभी से!ये कहकर अजय रजाई ओढ़कर सो जाता है!अनिल और पंकज दोनों देखते रह जाते हैं!

अगली सुबह,आठ बजे तक अजय नहा कर तैयार हो जाता है कि तभी अनिल और पंकज उठ जाते हैं और पंकज उससे पूछता है यार बाहर बर्फ पड़ रही है और अभी सिर्फ आठ बजे हैं तो इतनी सुबह तू कहाँ जा रहा है तैयार होकर?

ओह अभी आठ ही बजे है,मैंने ध्यान ही नही दिया!अजय मायूस होकर कहता है!

अब अनिल कहता है तू पहले ये बता कि तू जा कहाँ रहा है?

अजय कहता है अदरक वाली चाय पीने,जबसे यहाँ आया हूँ  बस चाय ही चाय अच्छी लगती है!

अब अनिल कहता है तू अब हमें सच बताता है या नही?क्या राज है इस अदरक वाली चाय का?

अजय अब उन्हें कल शाम की सारी बात बता देता है,ये सुनकर वो गाड़ी की चाबी देकर कहते है तू गाड़ी ले जा,हमने कहीं जाना हुआ तो टैक्सी कर लेंगे!वैसे भी आज हमारा रूम में ही विस्की पीने का प्लान है!


अजय भी चाबी लेकर ठीक दस बजे वहाँ पहुँच जाता है!

अब अजय उसी चाय की दुकान पर बैठ जाता है कि तभी कुछ ही पलों में वहां शिवानी आ जाती है!अजय तो बस उसे देखता ही रह जाता है!दिन में शिवानी ओर भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी!नीले रँग की जीन्स,लम्बा गहरे भूरे रँग का कोट,उसपर सिर पर हैट और हाथों में दास्ताने पहन कर बहुत सुंदर लग रही थी शिवानी!

अजय ने शिवानी को देखते ही दो कप चाय का आर्डर दे दिया और साथ मे सैंडविच का भी!

अब शिवानी ठीक अजय के सामने पलकें झुकाए बैठी हुई थी कि तभी अजय कहता है शिवानी एक बात कहूँ अगर बुरा ना मानो तो?

शिवानी भी बड़े प्यार से कहती है बोलिये!

क्या मुझे शिमला घुमाओगी?चलोगी मेरे साथ?अजय उससे पूछता है तो वो कुछ सोच में पड़ जाती है!तो अजय फिर से कहता है मुझपर भरोसा करो शिवानी,तुम्हारे भरोसे को कभी नही तोडूंगा और अगर नही भी जाना तो फिर हम सारा दिन यहीं चाय पीकर भी काम चला सकते हैं?



अब शिवानी उसकी बात सुनकर कहती है अगर भरोसा ना होता तो मैं यहाँ भी ना आती,चलिए आपको यहाँ का प्रसिद्ध जाखू मन्दिर दिखा कर लाएं!लेकिन मैं आपके साथ सिर्फ शाम के 4बजे तक ही हूँ क्योंकि मैं कॉलेज के समय में यहाँ आई हूँ और उसके बाद मुझे वापिस जाना होगा!

ओह,तो आप कॉलेज से बंक करके चोरी से हमसे मिलने आईं है?क्या मैं जान सकता हूँ कि इतना बड़ा खतरा क्यों उठाया तुमने?

कुछ सवालों के जवाब दिए नही जाते,बस महसूस किए जाते हैं!शिवानी कहती है और अब चाय पीकर दोनों चल पड़ते हैं जाखू मन्दिर की ओर जो कि शिमला से लगभग 10किलोमीटर दूर एक हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है!


रास्ते मे अजय शिवानी को कहता है कल तुम्हे देखने के लिए बहाने ढूँढ रहा था,आज देखो किस्मत ने कैसा साथ दिया कि तुम मेरे इतने करीब मेरे साथ बैठी हो!बिल्कुल ख्वाब से लगता है सब!

शिवानी भी उसकी बातें सुनकर मुस्कुराने लगती है और पलकें झुका लेती है!अब दोनों बातें करते हुए मन्दिर पहुँच जाते हैं और एक साथ माथा टेक कर बाहर आ जाते हैं!अब शिवानी उसे वहाँ से थोड़ी ही दूर एक ढाबे पर लेकर जाती है जो बहुत ही सुंदर है!पहाड़ियों के बीच मे उस ढाबे के आगे एक बड़ा सा बगीचा है,जिसमे बांस की छोटी-२ झोंपड़ियाँ बनी हुई है!चारों ओर ढेर सारे फूल लगे हैं जो उसे ओर भी आकर्षित बना रहे हैं!दोनों उनमे से ही एक मे आमने-सामने बैठ जाते हैं और खाने का आर्डर देते हैं!

अब अजय शिवानी का हाथ पकड़ कर कहता है शिवानी मैं तुम्हे बहुत चाहने लगा हूँ,अपनी सारी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ!क्या तुम भी मुझसे उतना ही प्यार करती हो जितना कि मैं?

अब शिवानी अजय की बात सुनकर हँसने लगती है!

अब अजय उसे हँसता हुआ देखकर उससे पूछता है इतना क्यों हँस रही हो?अब आज मैंने क्या किया?

अब शिवानी अपनी हँसी को नियंत्रित करते हुए कहती है कितने बड़े बुद्धू हो तुम अजय,एक लड़की तुम्हारे एक बार बुलाने से तुमसे मिलने आ गई,तुम पर भरोसा करके तुम्हारे साथ इतनी दूर चली आई और तुम हो कि मेरे मन की बात भी नही समझ पाए!

हाँ,उड़ा लो मेरा मजाक,कल भी उड़ाया था आज भी उड़ा लो!अजय झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहता है!

अब शिवानी उसे कहती है मैं तो तुम्हे तभी से चाहने लगी थी जब पहली बार तुमने अपनी बाहों में मुझे सहारा दिया था!पहली बार मुझे किसी लड़के ने इस तरह संभालाथा,तभी से प्यार कर बैठी थी मैं तुमसे!

अजय अब उससे कहता है चलो फिर मुझसे वादा करो मुझे सिर्फ मुझे चाहोगी हमेशा,चाहे कुछ भी हो अपना प्यार मेरे लिए कभी कम नही करोगी!

शिवानी उसे कहती है,अजय अभी मन्दिर से आई हूँ इसीलिए भगवान को साक्षी मानकर कहती हूँ कि शिवानी हमेशा तुम्हारी रहेगी चाहे कैसी भी परिस्थिति आए!

मैं भी तुमसे वादा करता हूँ जबतक ये दिल धड़केगा तबतक इसमे सिर्फ तुम ही रहोगी शिवानी!ये कहकर दोनों एक -दूसरे के गले लगते हैं और खाना खाकर वापिस आ जाते है!अजय उसे उसके घर से थोड़ी ही दूर छोड़ देता है और साथ ही कल मिलने का वादा भी ले लेता है उस अदरक वाली चाय की दुकान पर!

इस तरह दोनों अगले दिन फिर मिले उसी अदरक वाली चाय की दुकान पर!दोनों ने मॉलरोड पर खूब सैर की और अजय ने शिवानी को एक शॉल भी गिफ्ट किया वो भी खुद ओढ़ाकर!आज शिवानी और अजय बहुत खुश थे,उनका प्यार परवान जो चढ़ रहा था!लगता ही नही था कि उन्हें एक-दूसरे को जानते हुए सिर्फ तीन दिन हुए हैं!दोनों को मिलते हुए तीन दिन हो गए थे!अब तो उस चाय की दुकान के मालिक को भी दोनों की पहचान हो गई थी!

वर्तमान समय-अजय(दादाजी) की आँखे भीगी हुई थी उन लम्हों को याद करके कि तभी निखिल बोला अरे दादू आप तो बहुत फ़ास्ट निकले,तीन दिन में लड़की पटा ली  वो भी बिना किसी फ़ोन या मोबाइल के!एक आज का जमाना है लड़की का नम्बर मिलने में ही कई दिन निकल जाते हैं!

तभी जगत बोलता है दादू आपकी लवस्टोरी तो बहुत रोमांटिक है,प्लीज आगे भी सुनाइये ना क्या हुआ?

अब दादाजी बोलते हैं अभी तो प्यार शुरू ही हुआ है बेटा,अभी हम दोनों के प्यार तुमने सुना ही कहाँ है?अभी तो बहुत से इम्तिहान देने थे हम दोनों को!

तो सुनाइये ना दादू,निखिल कहता है!

अगला भाग-कल

ॐनमःशिवाय
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