राजेश की मां अपने बेटे की पसंद को अच्छे से जानती थी । इसलिए उन्होंने स्वाति को देखने आने से पहले ही राजेश की पसंद के बारे में सब कुछ बता दिया था । गोपाल जी को आधुनिकता में रची-बसी लड़की पसंद नहीं थी । वो अपने इकलौते बेटे के लिए संस्कारी बहू चाहते थे । जो आधुनिक होने के साथ-साथ अपने संस्कारों को भी जानती और मानती हो । इसलिए जब उन्होंने किसी शादी में पहली बार स्वाति को देखा तो अपने बेटे के लिए पसंद कर लिया और आज रिश्ता पक्का भी कर दिया । गोपाल प्रसाद जी एक सभ्य और अपने संस्कृति और संस्कारों को मानने वाले व्यक्ति हैं । इसलिए उन्होंने अपने बेटे के लिए स्वाति को पसंद किया । रात को सब जब घर आये तो उन्होंने राजेश को घर में बैठे हुए देखा ।
गोपाल प्रसाद जी के आते ही राजेश ने कहना शुरू किया - पापा , आप सब कुछ जानते हुए भी ऐसा क्यूं कर रहे हैं । आप जानते हो कि मैं रिचा को पसंद करता हूं । फिर आप ने मेरा रिश्ता क्यूं तय कर दिया ।
गोपाल प्रसाद जी ने गंभीर होते हुए कहा - राजेश , अब तुम बड़े हो गए हो । अपना अच्छा बुरा सब समझते हो । ठीक है , तुम्हें पूरी आजादी है तुम जो चाहे वो करो लेकिन मेरी एक बात ध्यान से सुनो ! अगर तुमने उस लड़की से शादी की तो तुम्हारा इस घर से और मुझसे रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा । मेरी चिता को भी आग लगाने का अधिकार तुम खो दोगे । ये बोल कर गोपाल प्रसाद जी अपने कमरे में चलें गये । गोपाल प्रसाद जी अपने कमरे में टहल रहे थे । उन्हें इस तरह परेशान देख उनकी पत्नी ने उनसे पूछा !
सरला देवी - आप परेशान मत होइए सब ठीक होगा । लेकिन आप मेरी एक बात मानेंगे ! आप एक बार रिचा से मिल क्यों नहीं लेते । शायद उसके बारे में आपकी राय बदल जाए ।
गोपाल प्रसाद जी उसी तरह गंभीर होते हुए बोले - सरला तुम मुझे अच्छे से जानती हो । मैं कोई भी फैसला बिना सोचे समझे नहीं लेता । मैं रिचा से मिल चुका हूं । तुम्हें याद है कुछ दिन पहले मैं बाज़ार गया था और वहां से आने के बाद मैं बहुत गुस्से में था । क्योंकि किसी ने मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई थी । उस दिन रविवार होने के कारण बाजार में बहुत भीड़ थी । जिसके कारण मैं चलते हुए एक लड़की से टकरा गया । मैंने उससे माफी मांगी की भीड़ होने के कारण मैं तुमसे टकरा गया बेटा । मुझे माफ़ करना । गोपाल प्रसाद जी आंखों से चश्मा उतार कर अपने आंखों के कोरो को पोंछते हुए कहते हैं । उसने भरी बाजार मेरी बेइज्जती की ये कहते हुए कि " सनकी बुढ्ढे तुझे दिखाई नहीं देता । तुम जैसे लोगो को मैं अच्छी तरह से जानती हूं । उम्र हो गई लेकिन हरकत से बाज नहीं आओगे । सनकी पागल गुस्से में ना जाने वो क्या क्या बोले जा रही थी । मैं वही सर झुकाए खड़ा रहा । वह मुझे बुरा भला कहती रही जब वह थक कर चुप हो गई तो वह एक लड़के के साथ उसके बाइक में बैठकर वहां से चली गई और मैं किसी जिंदा लाश की तरह घर आ गया । उसके कुछ दिन बाद राजेश ने किसी लड़की को पसंद करने और उससे शादी करने की बात कही और जब उसने उस लड़की की फोटो दिखाई । मैं स्तब्ध रह गया । रिचा की तस्वीर देखकर मैंने राजेश को उससे शादी करने के लिए मना कर दिया । आज राजेश को फैसला करना होगा कि उसे परिवार चाहिए या वह लड़की । किसी भी तरह से वह लड़की इस घर की बहु बनने के लायक नहीं है । यह कह कर गोपाल प्रसाद जी वही अपनी आराम कुर्सी पर आंख बंद करके बैठ गए । सरला देवी अपने पति के पास जाकर उन्हें समझाने लगी । आप फिकर मत कीजिए सब अच्छा होगा । मैं राजेश को जानती हूं उसके लिए परिवार से बढ़कर और कुछ नहीं है । देखना आप वह स्वाति से शादी करने के लिए मान जाएगा । अगले दिन राजेश ने शादी करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी । गोपाल जी को आश्चर्य हुआ कि कल तो उस लड़की से शादी करने की जिद कर रहा था । एक रात में इसकी सोच इतनी जल्दी कैसे बदल गई । लेकिन जो भी हो इस शादी के लिए इस ने हां कर दी है तो अब मुझे देर नहीं करनी चाहिए । यही सोच कर उन्होंने साथी के पापा के पास फोन किया ।
उधर से आवाज आई .....हैलो !
हैलो भाई साहब कैसे हैं आप ? स्वाति के पापा थोड़े घबराते हुए बात कर रहे थे । घबरा इसीलिए रहे थे कि कहीं उन्होंने इस रिश्ते के लिए मना तो नहीं कर देंगे ! जो उनके पिताजी सुबह-सुबह फोन कर रहे हैं । लेकिन उनकी घबराहट कुछ देर की थी जब उन्होंने सुना कि राजेश के पिताजी राजेश और स्वाति की शादी जल्दी करना चाहते हैं । इसी सिलसिले में उन्होंने स्वाति के पिताजी को अपने घर बुलवाया है । जब यह खबर उन्होंने घर में सुनाई तो सब खुश हो गए सिवाय स्वाति को छोड़कर । स्वाति इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहती थी । लेकिन अपने पापा के लिए वो शादी के लिए अपनी मंजूरी दे दी । कुछ ही हफ्तों की तैयारी में सगाई और शादी हो गई । शादी के बाद स्वाति अपने ससुराल आ गई । स्वाति ने गौर किया कि राजेश खुश नहीं लग रहें हैं । जूता छुपाई की रस्म में उनसे नेग मांगा गया । तो चेहरे पर बिना कोई भाव लाये उन्होंने पैसे दे दिए और यहां पर भी इनकी बहनों ने द्वार छेकनी का नेग मांगने पर उन्होंने यह कहकर नेग दे दिया कि मैं बहुत थक गया हूं मुझे परेशान मत करो । यह कहकर उन्होंने पैसे दे दिए और अपने कमरें में चले गए । स्वाति जहां थी वहीं खड़ी रह गई ...।
क्रमशः
रचनाकार - श्वेता सोनी

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