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"" भाभी जी ,,, आपके दहेज का बेड दिख
नहीं रहा है घर भी एकदम खाली खाली सा है, आप अपनी शादी में कुछ लेकर आई थी कि नहीं ""? दामाद पहली बार ससुराल आया था ...और घर पर सरसरी निगाह डालते हुए सासू मां के सामने अपनी बीवी की भाभी चिढ़ाते हुए पूछा ।
"" ननदोई जी ! आज जो आपका घर भरा हुआ है न, वो सब मेरे दहेज का ही है,
मेरे पिता ने मुझे दहेज में अपनी अत्यंत मूल्यवान वस्तु "संस्कार" दिया और मेरे पति ने सहर्ष स्वीकार किया ...."" शुल की तरह धंसते इस प्रश्न का उत्तर भाभी ने गर्वीले स्वभाव से दिया ।
""पर आपलोगों की प्रत्यक्षण क्षमता कमजोर होने कि वजह से... ननदोई जी! मैंने आपका घर भौतिक चीजों से भी भर दिया... और ये भी मेरे संस्कार की ही देन रही ""
भाभी ने करारा जवाब दिया उस व्यक्ति को जिससे पढ़ीलिखी ननद की शादी दहेज के दम पर करनी पड़ी थी अपनी गृहस्थी का बचाया सबकुछ लगा कर,,, उस परिस्थिति में जब... उसके ससुर जी कम आमदनी की वजह से एक फूटी कौड़ी भी नहीं बचा पाए थे अपनी बेटी के लिये।
दहेज के दम पर स्वयं की योग्यता का आकलन करने वाला अहंकार के मद में चूर वो व्यक्ति अपनी योग्यता का पुनः आकलन करने पर मजबूर हो गया।
मौलिक व स्वरचित
कीर्ति रश्मि "नन्द ✍️
वाराणसी

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