हाँ मैं खुद को बदलने जा रहा हूँ,
हो सके तो मेरे साथ चलना...
मैं अपने बुलंद हौसलों पे,
आज पहला कदम मैं रखने जा रहा हूँ...
हाँ मैं खुद को बदलने.......

ना रुकना है हमको,
बढ़ें जा रहा हूँ...
कलम की सियाही से,
खुद को लिखे जा रहा हूँ...
हाँ मैं खुद को बदलने.......

अब नींद मुझको आती नहीं है,
खुले आँखों से सपने संजोए जा रहा हूँ,
सिर्फ बैचैन रहता हूँ मैं भी,
तुम्हारा इन्तज़ार मैं करने जा रहा हूँ...
हाँ मैं खुद को बदलने.......

अगर हो समय तो निकलो जकड़ से,
नये पीढ़ियों को मैं गढ़ने जा रहा हूँ...
अकेले चला हूँ,ना कोई फिकर है,
अब मैं अपना इतिहास लिखने जा रहा हूँ...
हाँ मैं खुद को बदलने.......



       ✍️ विकास कुमार लाभ
                मधुबनी (बिहार)