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मानव प्रकृति की उत्कृष्ट सभ्यता हैं lमानव का कोई जाति नहीं होता हैं, जाति तो जानवरों का होता हैं, ये कुत्ता हैं, ये बिल्ली हैं, ये गधा हैं, ये बाघ हैं, ये हाथी हैं, ये घोड़ा हैं आदि -आदि, ये मानव के ऊपर कहीं से भी लागू नहीं होता,यह बस एक थोथी परम्परा हैं, जिसे सब पीढ़ियों से ढो रहा हैं
प्रत्येक मानव सभ्यता का उदय अच्छे संस्कारों से होता हैं, इस संसार की लगभग सभी सभ्यता उन्नत रही हैं, और हैं भी,आगे भी रहेगा , चूँकि मानव के जन्म के साथ ही सारे मानवीय गुण आ जाते हैं, इसलिए मानवता जीवित हैं, अब बात करते हैं जाति की तो इसकी उत्पति अपनी - अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए सत्ता लोभीयों ने की हैं, ताकि सत्ता बनी रहे l भोले - भाले समाजियों के ऊपर थप्पा मार दिया गया, पहले तो उसके कार्यों के आधार पर जाति का नाम दिया गया,फिर पेशों के आधार पर जातिगत नामकरण करके पीड़ित व कुंठित समाज को अलग - अलग जातियों में बाँटकर राज कर रहा हैं,जिसके कारण ये जाति कहीं पर धब्बा बन गया तो कहीं छप्पा बन गया हैं, गरीबों व महिलाओ के लिए धब्बा हैं, गलत लोग या सत्ताधारी कभी भी जाति का प्रयोग कर कुचल देते हैं, अब किसी भी कागजी या सरकारी काम मे जाति प्रमाण पत्र का छपा अतिअवश्यक हैं अन्यथा सरकार की ओर से लाभ नहीं मिलेगा l
सरांशतः हम सीधे शब्दों में कहना चाहते कि आज जाति - धर्म की आर में मानवता कुचली जा रही हैं, पाखंडों से त्रस्त - भ्रष्ट भारत त्राहिमाम - त्राहिमाम कर मानवता को बचाने के लिए भारत - पुत्रों को पुकार रहा हैं, जिसे केवल जातिविहीन व शिक्षित समाज ही अपने योग्यता और बुद्धिमता से अस्त - व्यस्त भारत देश को विकास की ओर अग्रसारित करेगा, क्योंकि एक सच्चा मनुष्य एक वर्ष में जो योगदान करता हैं,वह हजारों की भीड़ सदियों में भी नहीं करता हैं,इसलिए जाति का पाखंड छोड़ो,उत्कृष्ट समाज का निर्माण करों, जहाँ केवल मानवता ही सभ्यता व संस्कृति हो, मानवता की पहचान हो, विद्धता का सम्मान हो, इस पुनीत कार्य क़ो लक्ष्य तक बढ़ाने के लिए भारत के नागरिक़ो क़ो प्रत्येक सुबह उठकर शुभ
विचार में यह संकल्प करना होगा कि मेरे जीवन का हर क्षण केवल चिंतन व सेवा हो और प्रतिज्ञा करना होगा कि हम जो भी कार्य करेंगे वह भारत के स्वाभिमान से जुड़ा हो,,नए भारत के निर्माण में योगदान करें,पहले भारत के नागरिकों को जागृत करने का अभियान करें, फिर चलो चले हम सब मिलकर नया भारत गढ़े ll
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डॉ. ज्योति सिंह वेदी "येशु "
अध्यपिका, लेखिका, गायिका
चित्रकार एवं सामाजिक चिंतक
शिक्षा --पी. एच. डी. (समाज शास्त्र )
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आदर्श नगर, मधेपुरा, विहार
सवरचित एवं मौलिक अप्रकाशित
सर्वाधिकार सुरक्षित रचना

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