हमारी प्रेम कहानी में क्या क्या रंग होते 
गर तुम रांझा से ओर मै लैला से संग होते 

न होती घर संसार की चिंता न जमाने का डर 
न तुमको रोजगार देखना न मुझे परिवार का रंग

न होती यह बेदर्द रीति रिवाजों की बंदिशे हम पर 
न तुमको मां के आंचल की परवाह न मुझको सास का डर

न होते तुम एक कमाने वाले न मुझे कल की फिक्र 
भूल जाते हम भी सारे रिश्ते नाते याद रहते बस इश्क के किस्से