हमारी प्रेम कहानी में क्या क्या रंग होते
गर तुम रांझा से ओर मै लैला से संग होते
न होती घर संसार की चिंता न जमाने का डर
न तुमको रोजगार देखना न मुझे परिवार का रंग
न होती यह बेदर्द रीति रिवाजों की बंदिशे हम पर
न तुमको मां के आंचल की परवाह न मुझको सास का डर
न होते तुम एक कमाने वाले न मुझे कल की फिक्र
भूल जाते हम भी सारे रिश्ते नाते याद रहते बस इश्क के किस्से

0 टिप्पणियाँ