इंसान मैंने तेरी इंसानियत अक्सर मरते देखी
 पत्थरों से भी बेवजह आग निकलते देखी।।।।।।।

पत्थर तो बेजुबान था पर तू तो इंसान था 
तुझ में अक्सर मैंने हैवानियत पलते देखी।।।।।। 

बेरंग सी जिंदगी के पन्नों पर रंग भर दो
 मैंने अक्सर बुढ़ापे में  जिंदगी बेरंग देखी।।।।।।

 दोमुंहे दोगलों से तो गिरगिट भी शर्माता है 
गिरगिट से ज्यादा रंग बदलती दुनिया देखी।।।।।। 

कैसे अपनों को भूल गैरोंके हो जाते हैं लोग समझ ले,' सीमा 'चंद नोटों की खातिर खून की तासीर बदलते देखी।।।।।।