गतांक से आगे 👇
मृणाल अपनी खिड़की से नीचे सड़क के उस छोड़ को देखने से खुद को रोक नहीं पाई जहाॅं उसने कल उस लड़के को देखा था । ना जाने क्यूं उसकी ऑंखें उस लड़के को ढूॅंढ रही थी । दिल चाह रहा था कि वह एक बार मुझे दिख जाएं ।
यह मुझे क्या हो रहा है .... मैं क्यों उसका इंतजार कर रही हूॅं ... मेरा दिल क्यों चाह रहा है कि सिर्फ एक बार उससे बात करूं ? मृणाल के दिल के एक कोने से आवाज आई ।
मैंने उसे अपनी सब्जी उठाकर देने के लिए थैंक्स भी तो नहीं बोला । एक बार वह मिल जाएं तों उसे थैंक यू बोल दूं । मैं किसी का अहसास नहीं लेती और अगर उसने रिक्शे वालें को किराए का पैसा दिया है तों उसे पैसे भी तों लौटाने होंगे । वैसे शाम होने को आई है लेकिन अभी तक रिक्शा वाला पैसा लेने नहीं आया ।
मृणाल ने बड़बड़ाते हुए अपने आप से कहा ।
आज पाॅंच दिन हो गए हैं । मेरा मन रोज चाहता है कि
एक बार उस मोहल्ले में जाऊं और किसी भी तरह देखूं कि वह लड़की .... क्या नाम लेकर पुकारा था ??
मैं तों दूर होने की वजह से सुन ही नहीं पाया था । उस रिक्शे से उचित दूरी बनाकर बाइक जों चला रहा था ताकि वह लड़की मुझे देख ना लें । वैसे मेरा चेहरा हेलमेट से ढॅंका हुआ था लेकिन मुझे डर था कि कहीं वह मुझे मेरे शर्ट के कलर से ना पहचान लें और उसे मेरी वजह से कुछ सुनना ना पड़ जाएं .... राहुल अपने कमरे में चारों तरफ घूमते हुए बडबडाए ही
जा रहा था ।
राहुल की बेचैनी बढ़ने लगी । उसने टेबल पर रखे अपने बाइक की चाबी उठाई और अपने गैराज की तरफ बढ़ गया ।
कितनी देर हों गई है लेकिन वह लड़की दिख ही नहीं रही है । एक तों मई महीने की गर्मी और ऊपर से चिलचिलाती धूप । इन दोनों ने मिलकर मुझे बेहाल ही कर दिया है । एक बार उस लड़की को देख लूं कि वह ठीक-ठाक है मेरे दिल को सुकून मिल जाएगा और मैं अपने घर चला जाऊंगा ... यह मन ही मन में सोचते हुए राहुल ने एक बार फिर से उस लड़की के घर की तरफ देखा ।
अर्ज किया है 👇
" मौसमें हाल ने बेहाल कर दिया मुझे
सब कुछ दिखा लेकिन वह ही नहीं दिखा
जिसे देखने की तमन्ना
इधर खींच लाई थी मुझे "
राहुल ने उपरोक्त लाइनों को उस लड़की के घर की तरफ देखते हुए कहा । कुछ देर बाद अपनी बाइक स्टार्ट करते हुए वह दुखी मन से अपने घर की ओर निकल पड़ा ।
आज दिन भर एक पल को भी आराम नहीं था । भाभी को सारा काम जैसे आज ही करवाना था मुझसे । दोपहर में दिल से आवाज आई थी कि खिड़की से झाॅंक कर देखूं कि वह लड़का आज भी आया है या नहीं ?? काम ही इतना था कि चाह कर भी नहीं आ सकी ... रात को अपने पलंग पर सोते हुए मृणाल ने अपने आप से कहा ।
पाॅंच दिन नहीं आया तों आज भी नहीं ही आया होगा और वैसे भी मृणाल वह लड़का नहीं आया तों नहीं आया । तू क्यूं इतना उस लड़के के बारे में सोच रही हैं ? ..... मृणाल के दिल से आवाज उठी ।
हाॅं ! मेरा दिल सत्य कह रहा है । मैं क्यों उसके बारे में उस दिन के बाद से सोच रही हूॅं । जिस दिन दिख जाएगा पैसे लौटा दूंगी । उस लड़के के बारे में सोचते हुए मृणाल की ऑंखें बंद होने लगी ।
अर्ज किया है ... 👇
" तेरी ऑंखो की उदासी अभी भी
मुझे बेचैन कर रही है
मैं कल भी तुमसे मिलने आऊंगा
ना जाने क्यों मेरा दिल
मुझसे कह रहा है
तू भी मेरा ही इंतज़ार कर रही है "
यह कहते ही राहुल के चेहरे पर एक मुस्कान आई और उसने अपनी ऑंखों की पलकों को आहिस्ते-आहिस्ते बंद कर लिया ।
क्रमशः
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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