गुरेज में एलओसी पर घुसपैठ के चार माह पहले…….

  

  रात का समय है, सब कुछ शांत है इस शांति को भंग कर दिया एक कार्गो प्लेन के इंजन ने, जो प्रतिबंधित इराकी एयरस्पेस में उड़ रहा है इस प्लेन के सभी पहचान चिह्न मिटा दिए हैं इसीलिए यह किसका है यह कहना कठिन है। रडार से बचने के लिए इसका पायलट इसे काफी नीचे उड़ा रहा है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि ये किसी गुप्त अभियान पर है। पर यह जा कहाँ रहा है!

      कैम्प विक्ट्री आर्मी बेस बगदाद, इराक में यूएस आर्मी का मुख्य और देश के बाहर सबसे बड़ा आर्मी बेस है, यहाँ यूएस के अतिरिक्त कुछ नाटो देशों ने भी अपने सैनिक तैनात कर रखे हैं। यूएस के नेतृत्व में आईएस के विरुद्ध अभियान यहीं से संचालित होते हैं । अब जब इराक से आईएस का खात्मा हो चुका है तो सैनिक ऑपरेशन्स में कमी आ गई है जिसके कारण सारे सैनिक घर जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  वह अज्ञात कार्गो प्लेन इसी ओर आ रहा है।
    

  कैम्प के थोड़ा निकट पहुँचने पर पायलट ने अपने क्रू को सूचित किया, " १ मिनट टू एयरड्रॉप.."तोहफे" तैयार रखो..."

  जिसका क्रू मेंबर ने उत्तर दिया, " हम तैयार हैं...."

   आर्मी बेस के ऊपर पहुँचने के २५ सेकंड पहले ही पायलट ने क्रू को कार्गो सेक्शन खोलने के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया उसके बाद क्रू ने एक-एक करके सभी "तोहफे" नीचे गिरा दिए। हवा के प्रतिरोध का सामना करते हुए यह तोहफे कैम्प की ओर तेजी से गिरने लगे। इन तोहफों में क्या है ये तो इनके खुलने पर ही पता चलेगा।

    एयर बेस की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैनिकों के साथ ही स्थानीय इराकी सैनिकों को भी तैनात किया गया था रात के इस समय पहरा करने की बारी इराकियों की थी। बेस के बीच में बने टॉवर पर तैनात सैनिक को आकाश में कुछ दिखाई दिया उसने रेडियो पर अपने साथियों से पूछा, " क्या हमारे लिए एयर ड्रॉप के जरिए कुछ सामान आने वाला था? "

" नहीं तो बेस पर एयर ड्रॉप से सप्लाई भेजने की क्या जरूरत है इस काम के लिए ट्रक्स हैं न " ,दूसरे सैनिक ने उसका उत्तर दिया।

" तो फिर ये ऊपर से क्या गिर रहा है?" पहले सैनिक ने ऊपर से गिरते हुए एयर ड्रॉप्स की ओर सबका ध्यान दिलाया।

" इसके नीचे आने के बाद पता चलेगा फिलहाल इस पर नजर रखते हैं" , तीसरे सैनिक ने कहा।

  एयर ड्रॉप्स में क्या है इसे किसने भेजा है किसी को कुछ  समझ नहीं आ रहा था इसीलिए वे सभी उनके नीचे आने की प्रतीक्षा करने लगे।


       जमीन पर गिरने के पहले बीच हवा में ही सारे एयर ड्रॉप्स किसी क्लस्टर बम की तरह खुल गए और उनमें से कई छोटे- छोटे कंटेनर्स हवा में फैल गए। उन कंटेनर्स पर यह चिह्न बना हुआ था-


                
" ओह नहीं !!! " एक सैनिक ने शायद ये चिह्न देख लिए थे उसकी आवाज में भय का आभास हो रहा था।

" क्यों क्या हुआ ? "

" उन कंटेनर्स पर जो चिन्ह बना हुआ है वह रासायनिक हथियारों का चिह्न है, यानी हम पर केमिकल अटैक हुआ है। सबको सावधान कर दो, अलार्म बजाओ जल्दी। " 
                                                           

 

उसकी बात मानकर सैनिकों ने अलार्म बजा दिया, सायरन की आवाज से पूरा कैम्प गूँजने लगा इसके साथ ही लाउड स्पीकर पर हमले की सूचना दी जाने लगी,  जो बाहर टहल रहे थे उन सबको उनके बैरक्स में जाने को कहा जाने लगा। सुरक्षा में तैनात किए गए सैनिको ने एन्टी एयरक्राफ्ट गन्स संभाल ली और उन कंटेनर्स पर गोलियाँ बरसाने लगे। क्लस्टर बमों और गोलियों के बीच मुकाबला शुरू हो गया, कैम्प के आकाश में एक के बाद एक विस्फोट होने लगे जिससे निकला धुँआ पूरे कैम्प के ऊपर छा गया। इसके बाद सब कुछ शांत हो गया, सबको लगा कि संकट टल गया है इसीलिए उन्होंने बंदूकों को ठंडा होने के लिए छोड़ दिया। यही उनकी गलती थी, अभी धुँआ छँटा भी नहीं था कि क्लस्टर बमों की सेकंड वेव धूँए के बीच में से तेजी से निकलते हुए कैम्प की ओर बढ़ने लगी। इन्हें जमीन पर गिरने से रोकने के लिए एक बार फिर से एन्टी एयरक्राफ्ट बंदूकें गोलियाँ उगलने लगीं।   

     जो कंटेनर्स एन्टी एयरक्राफ्ट गन्स की गोलियों से बच गए थे वे कैम्प की धरती पर बने भवनों पर गिरने लगे। ठोस सतह से टकराते ही इन में तेज धमाके हुए जिसके असर से कंटेनर्स की सतह टूट गई और उनमें से अत्यंत विषैली "सल्फर-मस्टर्ड गैस" निकलने लगी।

         हवा में घुलती गैस सैनिकों के फेफड़ों के माध्यम से उनके शरीर में प्रवेश कर गई, उनकी आँखें जलने लगी; नाक की रक्त नलिकाएँ फट गईं; मुँह से-नाक से खून निकलने लगा; त्वचा में पीले फफोले पड़ने लगे , ओह ! बड़ा ही वीभत्स दृश्य था। कुछ सैनिक घायल हुए और कुछ तड़प-तड़प कर मर गए। ऐसी मृत्यु किसी को न मिले, किसी को न मिले। 
     
     बचने के आशा से कुछ सैनिक भवनों के अंदर छिपने लगे पर यह निरर्थक सिद्ध हुआ क्योंकि आतंकियों द्वारा गिराए गए क्लस्टर बमों ने उन भवनों को ही ध्वस्त कर दिया।


  अगले दिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सभी चैनलों पर यही समाचार दिखाया जा रहा था।

बीबीसी न्यूज़ रिपोर्ट - "कल रात कैम्प विक्ट्री आर्मी बेस पर रासायनिक हमला किया गया। इस हमले में २०० से अधिक सैनिकों के मारे गए और ५०० से अधिक सैनिकों के घायल होने की खबर है, इसके अतिरिक्त हमले में क्लस्टर बम का भी प्रयोग किया गया है जिससे अल फाव पैलेस को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचा है। अब तक जो जानकारी सामने आई है उसमें यह पता चला है कि हमले के लिए सल्फर-मस्टर्ड गैस का प्रयोग किया गया था।आपको बता दें कि इसकी जिम्मेदारी अभी तक किसी भी संगठन ने नहीं ली है, फिर भी आईएस पर ही सन्देह किया जा रहा है ऐसा लगता है आईएसआईएस लौट आया है।"

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  इस आक्रमण से यूएस सहित सभी नाटो देशों में हंगामा मच गया। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके आर्मी बेस पर कोई इस प्रकार का आक्रमण कर सकता है आईएस के ज्यादातर आतंकियों के इराक से भागने के बाद तो वे और निश्चिंत हो गए थे। यही उनकी भारी भूल सिद्ध हुई। अब उनकी जाँच एजेंसीज इस बात का पता लगाने में जुट गईं कि यह आक्रमण किसने किया है।

    कैम्प की हवा में अभी भी मस्टर्ड गैस के कण विचरण कर रहे थे इसीलिए पहले पूरे कैम्प की सफाई की गई उसके बाद जाँच एजेंसी के एजेंट्स अपनी जाँच में जुटे।
  पूरे कैम्प में यहाँ-वहाँ बिखरे हुए बमों के खोल को जमा करके फोरेंसिक लैब में विशेषज्ञ लोग जाँच करने लगे। उन्हें पता चला कि ये हथियार वही हैं जो कुछ दिन पहले मोसुल से चोरी हुए थे। चुराने वाले अभी तक पकड़े नहीं गए थे पर संदेह की सुई आईएसआईएस की ओर ही थी।

      वहीं दूसरी ओर इंटेलिजेंस के लोग उस कार्गो प्लेन के बारे में पता कर रहे थे जिसके द्वारा ये रासायनिक हथियार आर्मी बेस पर गिराए गए थे। इराक और सीरिया में फैले यूएस और उसके मित्र देशों के सीक्रेट एजेंट्स काम पर लग गए। उन्हीं में से एक एजेंट था सैंडस्टॉर्म, भारतीय मूल का यह एजेंट सी.आई.ए. में था, अरबी भाषा पर उसकी बेहतरीन पकड़ के चलते एजेंसी ने उसे सीरिया में तैनात किया था, यहाँ आकर वह एक विद्रोही संगठन से जुड़ गया था और असद सरकार के विरुद्ध ऑपरेशन्स में सहायता करने लगा। इस दौरान उसने कई संपर्क बनाए, इन्हीं संपर्कों में से एक ने उसे फ़ोन करके बताया, "सीरिया में असद सरकार की सहायता के लिए सप्लाई लेकर आया एक रूसी विमान चोरी कर लिया गया था संभव है कि इसी का उपयोग आतंकवादियों ने किया होगा, मेरे रशियन सूत्रों ने मुझे बताया कि अंतिम बार उसकी लोकेशन आईएस के नियंत्रण वाले क्षेत्र में ट्रेस की गई थी उसके बाद प्लेन से सिग्नल मिलने बन्द हो गए। "

 " पर क्या इन आतंकवादियों को प्लेन उड़ाना आता है? " सैंडस्टॉर्म ने पूछा।

 " नहीं इन्हें नहीं आता इसीलिए इन्होंने दूसरे संगठनों की सहायता ली है, हमें लगता है कि वे चेचेन्या के उग्रवादी होंगे क्योंकि हमने सीरिया और चेचेन्या के बीच कुछ कॉल्स इंटरसेप्ट किए थे तो हो सकता है कि दोनों इसी हमले की योजना बना रहे हों। " 


       सैंडस्टॉर्म को मिली इस जानकारी के अनुसार आई. एस. आई. एस. ने ही कैम्प विक्ट्री पर केमिकल अटैक किया था। उसने अपनी रिपोर्ट अपने उच्चाधिकारियों तक भेज दी, उन्हें तो पहले से ही अंदेशा था कि इसी संगठन ने हमला किया है पर वे इसकी पुष्टि होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब समय है प्रतिशोध का भूमध्य सागर में तैनात यूनाइटेड स्टेट्स नौसेना के युद्धपोत USS Arleigh Burke और यूएसएस फिलीपीन सी से आई.एस.आई.एस. के ठिकानों पर मिसाइल स्ट्राइक होने लगी, एक-एक कर के टॉमहॉक क्रूज मिसाइल्स जहाजों से छूटती और अपने लक्ष्य तक सबसोनिक गति से पहुँच कर उसे पूरी तरह नष्ट कर देती। इस आक्रमण में आतंकवादियों को काफी नुकसान हुआ उनके बहुत से लड़ाके मारे गए हथियार और छिपने के ठिकाने जिनके बारे में यूएस को पता था, सभी नष्ट हो गए। पर क्या इससे यह आतंकवादी संगठन भी नष्ट हो गया?


अफगानिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में एक कार्गो विमान जंगल के बीच बने एक छोटे से रनवे पर खड़ा था, देखने पर लगता है कि यह वही विमान है जिससे कैम्प विक्ट्री पर रासायनिक बम गिराए गए थे। कुछ हथियारबंद लोग इसकी सुरक्षा कर रहे थे और कुछ लोग उसमें से सामान उतार कर ट्रक में लोड कर रहे थे। यह लोग कौन हैं यह कहना कठिन है, पर इतना स्पष्ट है कि ये लोग आतंकवादी ही हैं क्योंकि जो सामान अभी इन्होंने उतारा है वह आर्टिलरी शेल्स के रूप में रासायनिक हथियार हैं।

     जब विमान से सभी तोप के गोले उतार लिए गए तब आतंकवादियों के सरदार ने अपने सैटेलाइट फ़ोन से किसी को फ़ोन किया, " जनाब, काम हो गया है केमिकल वेपन हमारे पास पहुँच गए हैं। "

उसकी यह बात सुनकर दूसरी ओर के व्यक्ति ने प्रसन्न होते हुए कहा, " बहुत बढ़िया, अपने चेचेन्या के दोस्तों से कहो कि हमारा साथ देने के लिए उनका शुक्रिया और उनका पेमेंट कर दो। अब हम दुनिया को दिखा देंगे कि दाईश खत्म नहीं हुआ है।"
    
" इंशा अल्लाह ", सरदार ने उसकी बात का समर्थन किया। फ़ोन रखने के बाद सरदार अपने एक आदमी को साथ लेकर विमान के अंदर चला गया जहाँ कॉकपिट में कुछ काकेशियन लोग बैठे हुए थे, उनसे उसने कहा, " हमारे बॉस आपके काम से बहुत खुश है उन्होंने आपको हमारी लड़ाई में साथ देने के लिए शुक्रिया कहा है। " उसके बाद उसने अपने आदमी से कहा, " इनका पेमेंट ट्रांसफर कर दो इन्हें। " 

       उस आदमी ने अपने बैग से एक टैबलेट कंप्यूटर निकाला, उसे इंटरनेट से जोड़ा और चेचेन्या उग्रवादियों के खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया। थोड़ी देर तक विमान के अंदर रहने के बाद दोनों विमान से बाहर आ गए और एक ट्रक में बैठकर वहाँ से अपने छिपने के स्थान को चले गए।

    मिडिल ईस्ट को इस्लामिक स्टेट बनाने में असफल होने के बाद आईएस अपना नया ठिकाना अफगानिस्तान में बना रहा है। तालिबान ने पहले से ही इस सुंदर देश की दुर्गति की हुई है अब आईएस भी यहाँ पैर जमा रहा है, ऐसे में सत्ता के लिए संघर्ष अवश्य होगा जिसमें यहाँ की जनता ही मारी जाएगी। 

   इससे पहले की रक्त रंजित संघर्ष प्रारंभ हो इसे रोकना होगा, रोकना ही होगा।





कहानी जारी रहेगी डर्टी बॉम्ब के अगले भाग में…………