हाय रे सरकारी नौकरी
जो लड़कियां घास तक ना डालती थी
सरकारी  नौकरी क्या लग गई
 खूबसूरत लड़कियों की लाइन लग गई.......... 
हम काले कलूटे लड़कों के किस्मत के ताला खुल गई
जो लड़कियां भाव ना देती थी
सरकारी नौकरी क्या लग गई
मधुमक्खियों की तरह पीछे पड़ गई
हमने हसीन सपने तो नहीं देखे थे
हमारे सपनो मे तो भूतनी ही आती थी
सरकारी नौकरी क्या लग गई
अब तो अप्सरा आसपास मंडराने लग गई.............
सोचा ना था हम काले कलूटे के भी
किस्मत कभी चमकेगा
अब तो अच्छे घर और खूबसूरत लड़कियों की रिश्तो की झड़ी लग गई
हाय रे सरकारी नौकरी क्या लग गई
जो लोग चिढ़ाते थे आज उनके बोल भी बदल गई........ 
हाय रे सरकारी नौकरी
दहेज देने वालों की लाइन लग गई
हम काले कलूटे लड़कों की किस्मत  बदल गई.........
सरकारी नौकरी क्या लग गई
हम काले कलूटे लड़को के किस्मत की ताला खुल गई................


सपना कुमारी
 जहानाबाद बिहार