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दूसरों के गुण और दोष गिनाने वालों,
कभी अपने अंदर भी झांक कर देखो।

बहुत गिना चुके  हो अब तक तो मेरा,
अपना भी देखो तो होश उड़ जायेगा।

कौन इंसा है भला जिसमे कमी ना हो,
कुछ न कुछ ऐब तो सभी में  होता  है।

अगर न ऐब हो आदमी में तो इंसा नहीं,
तब तो वो सीधे भगवान हुआ करता है।

जरुरी नहीं दूसरे की कमी गिनाई जाये,
जरुरी ये है कि अपने ऐब मिटाया जाये।

धोखा फरेब से दूर रहें ईमानदारी बरतें,
होसके किसी की मदद तो वो रहें करते।

कोई पड़ोसी कभी भूखा नहीं सोने पाये,
पशु पक्षियों के हेतु भी मन में दया आये।

किसीको सतायें ना न किसी की आह लें,
ये सब तो हो सकता है यदि आप चाह लें।

यही सच्चे इंसान का धर्म और पहचान है,
धरती के नर ही  तो नारायण भगवान हैं।

चलें लोगों की कमियों को ढूँढना बंद करें,
अपने जीवन को सुखमय और बुलंद करें।

रचयिता :

*डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*