गतांक से आगे 👇


माॅं ... मैंने तुम्हें सारी बातें बता तों दी है । वहाॅं चलकर कुछ बातें है जो क्लियर करनी है बस और कुछ नहीं करना  ..... राहुल अपनी माॅं के मनुहार में तब तक लगा रहा जब तक की वह मान नही गई । 


छोटी सी बात को यदि ज्यादा तूल दिया जाएं तो वह आग की तरह फैलने में अधिक समय नहीं लेती और यही आगे चलकर बदनामी का कारण बन जाती है और जब बात स्त्री - पुरुष या लड़के - लड़की की हो तो बदनामी के दाग से स्त्रियों या लड़कियों के कपड़े ही मैले हुए हैं । बदनामी का ठिकरा इन्हीं के सर पर ही फूटा हैं । अपशब्द, अपमान और प्रताड़ना इन्हीं को झेलनी पड़ी हैं इस तरह अपने आप को शिक्षित और सभ्य समाज कहलाने वाला यह समाज लड़की या स्त्री को ही  बदनाम, अपमान और तिरस्कार करता है । ऐसा सदियों से चलता आ रहा हैं और यह अभी भी हमारे समाज में व्याप्त है । 


लड़की ने ही उसको बुलाया होगा तभी तों वह लड़का इस मोहल्ले के चक्कर लगा रहा था । एक दो दिन से नहीं पूरे सात दिन से हमारे मोहल्ले में यह नयन मटक्का चल रहा था .... एक ने कहा ।


जब  कोई  बात एक मुख से दूसरे मुख तक जाती है तों आखिरी मुख से निकलने के साथ ही उस बात की 
सत्यता धूमिल हो चुकी होती है और उस बात में झूठ की परत चढ़ा दी गई होती है । जों कुछ अभी हों रहा था इसी का जीवंत उदाहरण था । 


देखने में तों बड़ी शरीफ दिखती है ..... और देखो ! एसे लक्षण हैं । बचपन में ही माॅं गुजर गई थी यह सुनकर बिन माॅं की बच्ची के लिए मेरे मन में प्यार के भाव थे लेकिन जिस लड़की के ऐसे लक्षण हों उसके पिता को हार्ट अटैक नहीं आएगा तों क्या आएगा ?? 
इन सबकी मृणाल ही वजह है । आप सब ही बोलों क्या मैं गलत कह रही हूॅं ..... दूसरी  ने इतराते हुए कहा । 

हाॅं .... हाॅं ... तुम सही कह रही हों कमला की माॅं ... 
सभी ने उसके समर्थन में नारे लगाए । 


चुप करिए आप सब .... मेरी माॅं समान बड़ी बहन के बारे में जो मुॅंह में आ रहा है  आप सभी  बोलें ही जा रहें और मैं एक नालायक भाई चुपचाप सुन रहा हूॅं ..... 
उपर से शांत दिखाई देने वाले व्यक्ति के भीतर भी कितना लावा भरा हो सकता है यह कोई नही जान सकता ।  जैसे - जैसे इस लावा में वृद्धि होती जाती हैं उसका विस्फोट होना निश्चित हों जाता है। 


मृणाल का छोटा भाई जों उस समय से चुपचाप खड़ा मोहल्ले भर की बातें सुन रहा था उसकी सहनशीलता ने जवाब देकर विस्फोटक रूप धारण कर लिया था और वह उन्हीं सभ्य समाज के  प्रत्येक प्रतिष्ठित लोगों के सामने जा - जाकर यह सवाल कर बैठा कि अगर ऐसा कुछ आपके परिवार में आपके बेटियों के साथ हुआ होता तो क्या आप लोगों का यही प्रवचन होता हैं जो अभी था ?? 


इसका कोई तों हल निकलना चाहिए .... प्रतिष्ठित और सभ्य समाज की भीड़ में से ही किसी एक की आवाज थी । 


मृणाल का छोटा भाई पास जाकर उस प्रतिष्ठित व्यक्ति को इस सवाल का जवाब देने ही वाला था कि उसकी नज़र सामने से आते हुए तीन लोगों पर पड़ी । 


यही तों हैं वह लड़का .... भीड़ की फुसफुसाहट में निकलें इन शब्दों को लगभग हर किसी ने सुना । मृणाल के छोटे भाई के चेहरे के हाव-भाव को देखकर राहुल के साथ - साथ हर किसी ने देखा कि सामने से आते हुए तीन लोगों को देखकर उसे तनिक भी खुशी नहीं हुई है । 


घर आएं हुए मेहमानों के साथ मैं बुरा व्यवहार करूं ऐसे संस्कार ना ही मेरे पिता ने ही मुझे दिए हैं और ना ही माॅं समान मेरी बड़ी बहन ने ..... मन में सोचते हुए मृणाल का छोटा भाई सामने से आ रहे राहुल और उसके मम्मी - पापा की तरफ बढ़ा । 


उन्हें उचित सम्मान और आतिथ्य परंपरा देने के बाद मृणाल के छोटे भाई ने मोहल्ले के लोगों के आगे हाथ जोड़ लिए और कहा कि हमारे घर मेहमान आए हैं  
आप लोगों से हम बाद में बातें करेंगे । 


इतनी भीड़ क्यों हैं ? कहते हुए राहुल ने मृणाल के भाई की तरफ देखा ।


देख मृणाल बेटा ..... तेरा आशिक कैसे तुझे अकेले फॅंसा कर अनजान बन रहा है ?? भीड़ में से यह बीच की आवाज थी । 


कौन बोला ... जिस किसी को जो भी बोलना हैं सामने आकर कहें । मुझे जानना है कि किसके मन में मेरी बहन के प्रति दुर्भावना भरी हुई है .... मृणाल के भाई ने चारों तरफ नजरें दौड़ाते हुए कहा । 


राहुल की नजरें मृणाल पर गई जो एक कोने खड़ी सर झुकाए ऑंसुएं बहा रही थी । उसकी हालत देखकर राहुल का दिल भी रो पड़ा । 


मृणाल की ऑंखो में दर्द और ऑंसू देखकर मेरा दिल उदास हो जाता है । मैं इसे कभी दुखी नहीं देख सकता । मुझे सारी बातें आज ही क्लीयर करनी होगी .. नहीं तों मृणाल की जिंदगी नर्क बन जाएगी ... राहुल ने मृणाल की  तरफ देखते हुए मन में कहा । 


देखो   अनिकेत  !  यह लड़का  तेरे घर में बैठ कर अभी भी तेरी बहन को ही घूर रहा है ... मोहल्ले भर की चाची की आवाज कमरे में गूंजने लगी जो मृणाल के छोटे भाई के पास आकर कह रही थी । 


मैं कुछ कहना चाहता हूॅं । आप सभी यहाॅं उपस्थित हैं यह मेरे लिए सबसे अच्छी बात है क्योंकि हर एक को समझाना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल हो जाता ... चेहरे पर हॅंसी के साथ राहुल ने कहना शुरू किया ।  


  मैं  एक  फौजी  हूॅं  और नौ महीने की कड़ी ट्रेनिंग करके एक महीने की छुट्टी में अपने घर आया हूॅं । पंद्रह दिन बचे हैं मुझे अपनी बटालियन के पास लौटने में । हम फौजियों को फौज में  सिखाया जाता है  कि  हमारा  पहला  कर्तव्य  है :-  अपने देश और देशवासियों की  सुरक्षा और सहायता  अपनी जान से भी पहले  करना । मैं ड्यूटी पर रहूं या छुट्टी में ...   मैं अपने कर्तव्यों  की ओर से मुख नहीं मोड़ सकता और यहाॅं तों गलती  सिर्फ मेरी थी । ऐसे में मैं मृणाल जी की मदद कैसे नहीं करता ?? 


एक पल सांस लेकर राहुल ने अनिकेत ( मृणाल का छोटा भाई ) की तरफ देखते हुए कहा 👇


एक दिन  जल्दबाजी में मैं सब्जी मंडी में मृणाल जी से टकरा गया । मेरी वजह से  इनके पैर में मोच आ गई थी । मैंने  एक फौजी का धर्म निभाते हुए 
उनकी  सहायता करने की कोशिश की लेकिन  इन्होंने मेरी मदद लेने से इंकार कर दिया  । मैं भी ठहरा  जिद्दी  फौजी ! मैंने इनकी सहायता करने के लिए तरकीब निकाल ही ली ... 


राहुल  उस दिन की बातें कहते हुए उन पलों की  याद में  ऐसे खो गया  कि उसे यह यह भी ध्यान नहीं रहा कि वह मृणाल को अपशब्द , अपमान और अपयश से बचाने के लिए यह सब कर रहा है । 


फौजी बाबू ! ऐसे ही मुस्कुराते रहेंगे या हम सबको बताएंगे कि आपने मृणाल की मदद कैसे की ?? 
कानों में आई जोरदार आवाज से राहुल की तंद्रा भंग हुई और उसने आगे की सारी बातें विस्तारपूर्वक कह सुनाई । 


हम सब  सिर्फ यह जानकर कि आप हमारे देश के फौजी है और यह करना आपका कर्तव्य था । बिना सत्यता जाने सिर्फ आपके कहने मात्र से ही आपके द्वारा कही हर एक बात हम सभी कैसे मान लें ?   
आपने जों भी अभी कहा क्या इसका प्रमाण आपके पास है फौजी बाबू ? 

प्रमाण .....  वह महिला मेरी सत्यता का प्रमाण है  लेकिन मैं उसे नहीं जानता । अगर मैं उन महिला का घर जानता तो अभी अपनी बातों का प्रत्यक्ष प्रमाण आप सभी के समक्ष रख देता लेकिन ....... 
राहुल  के दिल से आह निकली  और वह मृणाल की तरफ देखने लगा । 

क्रमशः 

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓