दुनिया में हर इंसान अपने माता-पिता का हाथ पकड़ कर ही,पहला कदम रखता हैं।इंसान जब शिशुअवस्था में चलना सीखता है,तो अपने माता-पिता के हाथों में हाथ रख पूरे विश्वास के साथ पहला कदम धरातल पर रखता है,और अपने जीवन की हर अवस्था को पार करता है,इसलिए माता-पिता को भगवान के बाद का दर्जा दिया जाता है।
                         
                        जिंदगी के हर पड़ाव में चलना पड़ता है, चाहे वह सुख हो या दुख।माता पिता के दिखाए सतमार्ग में चलकर ही हम अपने जीवन को सार्थक बना पाते हैं।अच्छे संस्कार ही हमें जीवन में भटकने नहीं देते। इसलिए कहा भी जाता है,"उच्च शिक्षा तभी सफल कहलाती है।जब हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार भी देते हैं।" शिक्षा तो बच्चे प्राप्त कर ही लेते हैं यदि अच्छे संस्कार ना दे पाए,तो हमारे बच्चे जीवन के आने वाले सुख-दुख और कठिन परिस्थितियों से सामना नहीं कर पाते,उन्हें अच्छे बुरे का ज्ञान भी नहीं हो पाता।
                      
                        अर्थात माता-पिता के हाथों में ही हमारा सुनहरा,सार्थक और सफल जीवन है।उनके आशीर्वाद और साथ के बिना हमारा अस्तित्व कुछ भी नहीं है। उनके विचारों और संस्कारों को साथ लेकर चलने से ही हमारा जीवन सफल हो पाता है।जीवन में उनका साथ होना हमारे लिए बहुमूल्य है।

  (कुछ चंद पंक्तियां मेरे माता-पिता के लिए)
      मिले हर जन्म में मां पापा आप
      जहां मिले संस्कारों की सौगात ।।
      हर दुख को सहते हैं आप
      देते हमे खुशियों की सौगात  ।।
      है आज हम सबकी, भगवान से दुआ
      देंगे हमेशा खुशियां,चरणों में है"शीश झुका"।।
                                  🙏🙏🙏(A,M,H)
                               


  मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)