वक़्त चलता है लम्हा लम्हा
दिल जलता है लम्हा लम्हा
जब हो जाता है इंसान को गुरुर
तो सीरत बदलता है लम्हा लम्हा
महज चार दिन की जिंदगानी अपनी
कहाँ पता चलता है लम्हा लम्हा
कर ले खिदमत बुजुर्गों की
दुआ लगता है लम्हा लम्हा
अपना हुनर दुनिया को दिखा
किस्मत बदलता है लम्हा लम्हा
आपस मे इखलाख रख
मोहब्बत बढ़ता है लम्हा लम्हा
वही सच्चा है इस दुनिया मे
जो बदी से डरता है लम्हा लम्हा
परवाने भी आ जाते हैं कभी कभी
जब सम्मा जलता है लम्हा लम्हा
आपका मुकेश लखनवी

0 टिप्पणियाँ