उम्मीद ने चुपके से मेरे कानों में आकर कहा
सब्र रख,निराश न हो ,फिर से प्रयास कर
कोशिश करने से मंजिल मिलती जरूर है
चाहे वो क्यों न कितनी भी दूर है
कदम पीछे न हटाना ,आगे बढ़ते जाना
बाधाएँ तो आयेंगी उनसे क्या घबराना...
रश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022
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