💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अनौखा तीन लोकों से लगे तेरा शिवाला है,
जटा में बहती गंगा है गले में लिपटा काला है।
हलाहल धारते गले में कहाते नीलकंठेश्वर,
करे नंदी सवारी माथ पर चंदा उजाला है।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
खुले अम्बर तले बैठे बिछाए मृग की छाला है,
गोद में सोहता अनुपम मातु गौरी का लाला है,
विराजी बाम में गौरा जगत जननी कहाती है,
संग में भूत प्रेतों से सजा दरवार निराला है।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
न छप्पन भोग पाते है चाहिए भांग प्याला है,
सुवाषित पुष्प न भाते है गले रुद्राक्ष माला है,
मले तन पर अपावन राख फिर पावन कहाते है,
अशिव भूषण से शोभित है शिव धाम कृपाला है।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
चरण में प्रीत है सच्ची जपी जिन्ह शिव की माला है,
हरे संकट है भक्तों के वही जग का रखवाला है,
बजाते डम-दम डमरू और वो नटराज कहाते है,
अनोखे रूप से शोभित वह गौरी माँ का भोला है।।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

0 टिप्पणियाँ