गतांक से  आगे  👇



    अर्ज    किया  है  👇

"  आ        गया       हूॅं             मैं 
   अपनी एक झलक तों दिखला दो 
  मेरे    दिल    को  तसल्ली    देकर 
   बेशक   तुम      चली      जाओ " 

यह कहते ही राहुल की ऑंखो में चमक और होंठों पर मुस्कान आ गई । वह सड़क के उस पार सिर्फ एक ही उम्मीद में तों खड़ा था कि किसी तरह भी उस लड़की को एक नजर देख लें ताकि उसके  बेचैन दिल को तसल्ली मिल जाए कि वह लड़की ठीक है । 

इधर मृणाल का दिल भी उससे यह कह रहा था कि शायद वह आज उसे दिख जाएं तभी तों बार - बार उसकी ऑंखें खिड़की के बाहर सड़क के पार देख रही थी । 

मृणाल के दिल में उठी चाहत पूरी हों गई जब उसने उस लड़के को सड़क के पार बाइक   पर   बैठे   हुए देखा । उसका मन खुशी से नाच उठा । 

यह मेरे मन को हों क्या रहा है .... क्यों मैं इतनी खुश हो रही हों जैसे आज मेरे दिल की मुराद पूरी हुई  हो .... यह गलत है .... मेरे मन में क्या उस लड़के के लिए ....... नहीं .... नहीं ....  साफ दिखता हैं कि वह उम्र में मुझसे छोटा है । मेरा और उसका मेल हों ही नहीं सकता । हों सकता है वह सिर्फ मुझे देख कर तसल्ली करना चाहता हों कि मेरे पैर की मोच ठीक है या नहीं ?? लड़का   तों दिल का  अच्छा   हैं ..... 
मैं उसके पैसे दे देती हूॅं शाय़द वह अपने पैसे लेने के लिए ही आया हो .... यह सोचते हुए मृणाल अपने पर्स को ढूंढने लगी । 


हाॅं .... वह पैसे लेने ही आया होगा क्योंकि उसे भी तों दिख ही गया होगा कि वह मुझसे छोटा है ... 
मन में सोचते हुए मृणाल अपने कमरे से  निकल
पड़ी । सौ रुपए उसकी हाथ में थे । उसने पहले तो इधर - उधर देखा और तेजी से सड़क के पार जाने के लिए अपने गेट से बाहर निकल पड़ी । 


धक .... धक ... धक ... धक ... मेरा दिल ! तू इतनी जोर से क्यों धड़कने लगा ??? राहुल ने अपने दिल पर हाथ रखते हुए कहा । 

अर्ज किया है 👇

" पास आते हुए लम्हों की कसम 
  आज   तों   आपने  मेरा   दिल 
   बडी़ जोर से धड़का   दिया 
   एक    प्रेमिका      की     तरह " 

कुछ कहा आपने ?? मृणाल के इन शब्दों की मिठास इतनी मीठी थी कि राहुल के कानों में यह मिस्री की तरह घुलने लगी । 

मैं आपको पैसे देने आई थी .... यह लीजिए ... यह कहकर मृणाल ने सौ रुपए का नोट राहुल की तरफ बढ़ा दिया । 

मैं पैसे लेने नहीं आया था । मैं तों सिर्फ आपको देखने के लिए आया था ... नहीं ... नहीं .... मुझे ग़लत मत समझिए मेरा मतलब है कि आप उस दिन चल नहीं पा रही थी तों मैं यह देखना चाहता था कि आप ठीक तों हैं ... मेरा मतलब आपका पैर ठीक तों हैं ... दर्द तों नहीं है ... मैं ..... राहुल हकलाने लगा । 


आप तों एसे हकला रहें हों कि जैसे चोर पकड़े जाने पर पुलिस के सामने डर के मारे हकलाते हैं । इन बातों को छोड़िए !  हमें इस तरह कोई देख लें उससे पहले आप यह किराए के पैसें लीजिए और आइंदा कभी भी इस गली में नहीं आइएगा । अगर किसी ने आपको मेरे साथ देख लिया मेरे साथ-साथ आपकी भी क्लास लग जाएगी .. मृणाल ने यह कहते हुए सौ का नोट राहुल की बाइक की सीट पर रखा और जैसे ही मुड़ी उसने देखा कि उसकी भाभी पड़ोस की चाची के साथ उसकी तरफ ही बढ़ रही है । 


मृणाल के कदम वहीं पर रूक गए । मृणाल .......यह दिन दिखाने के लिए ही अब तक भगवान ने मुझे जिंदा रखा था क्या ???   मृणाल की चाची ने गुस्से में कहा । 

मृणाल की भाभी   राहुल के पास पहुंच चुकी थी और गुस्से में उसने प्रश्नों की झड़ी ही लगा दी । वह उसपर इल्जाम लगाने से भी पीछे नहीं रही । आस-पास मोहल्ले के लोग इकट्ठे होने लगे जिसे देखकर मृणाल घबरा गई । 

वो तों सिर्फ पैसे देने आई थीं । आप तों बात का ही बतंगड़ बना रही है ... राहुल ने कहा । 

ऐ छोरे .... ज्यादा बातें मत बना । कल तू ही था ना जों पूरे दिन यहीं पर बाइक लेकर खड़ा था । मैंने देखा था तुझे लेकिन मुझे यह पता ना था कि तू इस सड़क पर हमारे घर की इज्ज़त उछालने के लिए कल भी आया था और आज भी आया है मृणाल की चाची जो अब तक मृणाल का हाथ पकड़ यहाॅं तक आ चुकी थी ने राहुल को ऑंखें दिखाते हुए कहा । 

हाॅं .... मैं यहाॅंं आया जरूर था लेकिन आप जों कह रही है मेरा इरादा ऐसा करने का  बिल्कुल भी  नहीं था । मैं तों सिर्फ इन्हें देखने आया था .... मेरा मतलब है कि इनकी चोट देखने आया था ... राहुल ने सफाई देते हुए कहा । 

इधर - उधर की बातें मत कर । अगर तू सच्चा हैं तों कल अपने माॅं - बाप को लेकर आना हम उनसे ही पूछ लेंगे कि आपका लड़का कैसा है ??? कहते हुए मृणाल की भाभी ने उसे वहाॅं से जाने का इशारा किया । 

मैं कह रहा हूॅं ना ! आपलोग जों सोच रहें हैं वैसा कुछ भी नहीं है । मैं तों मृणाल से छः दिन पहले ही पहली बार मिला था और आज इनसे दूसरी बार मिल रहा हूॅं .... राहुल ने हाथ जोड़ते हुए कहा । 

अच्छा ..... तुम्हें इसका नाम भी मालूम है और हमने तुम्हें बातें करते हुए भी तों सुना है फिर भी तुम .... मृणाल की चाची  कहते - कहते रूक गई । 

वह तो आपने ही उन्हें इस नाम से अभी बुलाया था। मैं तो अभी से पहले इनका नाम तक नहीं जानता था .... राहुल ने कहा । 

अब कल बात होगी ... जाओ यहाॅं से .... मृणाल की भाभी ने गुस्से में जोर से कहा । 

राहुल ने एक नजर मृणाल को देखा और बाइक स्टार्ट कर सामने के रास्ते की ओर चला गया । 

मृणाल को उसकी चाची और भाभी हाथ पकड़ कर घर के अंदर लें आए । घर का इतना सारा काम पड़ा है और आपको नयन मटक्का से ही फुर्सत नहीं है ....  किचन की तरफ इशारा करते हुए मृणाल की भाभी ने कहा । 

मृणाल की भाभी और चाची के बीच ऑंखो ही ऑंखो में कुछ बातें हुई और दोनों एक साथ बोल पड़ी " अब आएगी ऊॅंट पहाड़ के नीचे " । 

क्रमशः 


" गुॅंजन कमल " 💗💞💓