मेरे लिए बंदर, तो कभी घोड़ा बन जाते,
कंधे पर बिठा के सुपरमैन तक बन जाते,
बचपन में दांत टूटने पर गिफ्ट खुद लाते,
और टूथफैरी का नाम बताते,
हर एक तस्वीर को सहेज के रखते,
छूटी वाले दिन हमारे लिए वो ही नाश्ता बनाते,
लुडो और कैरम के खेल मे जानबूझकर हार जाते,
पैसे ना होने पर भी,
हर फरमाइश को पूरी करते,
पता नही वो जादू की छड़ी कहा से लाते,
गलती करने पर डाटते और फिर मनाते,
थक हार कर जब वो घर आते,
तो पहले हमें ही बुलाते,
बीना किसी बात के हारा बाजी लगाते,
खुद हार कर खुश हो जाते,
दर्द कितना भी हो छुपा लेते,
खुद काटों पे चल के हमारे लिए फूल बिछाते,
पिता हम सबके ऐसे ही होते हैl

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