बड़ा वेवफा है ये वक्त
दूरी हो मजबूरी हो
इंतजार में काटे कटता नहीं
हो हाथों में हाथ
हो मिलन की चांदनी रात
बेदर्दी एक पल के लिए भी ठहरता नहीं
गिरगिट की तरह बहरूपिया है रंग बदलता रहता है
आंधी हो या तूफान रूकता नहीं
रेत सा फिसलता ही रहता है हर घड़ी
थक जाता है इंसान बुरे वक्त को संवारते संवारते
मगर ये वक्त कभी कभी जां देकर भी संवरता नहीं
कभी कभी जां देकर भी संवरता नहीं।।
किस मिट्टी से बना है कभी थकता नहीं
मनमौजी है चलना ही इसका काम
कभी जीवन में सीधे चले
कभी उल्टे पड़ते इसके पांव
कभी तपती धूप है वक्त
कभी है शीतल ठंडी छांव
कभी लगाए मरहम वक्त
कभी दिल में देता गहरे गहरे घाव
वक्त है जनाब ये किसी की सुनता नहीं।
लाख समझालो यारों
बेवफा वक्त दिल के दर्द समझता नहीं
जुल्मी कभी सुधरता नहीं।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐

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