बेरंग हो गई ये जिंदगी ....
बेबस हो गई मैं इस तरह .....
बिन रंगों के कैनवास पर बनी ....
तस्वीर हो जिस तरह .....
 
एक दिन हवा का एक झोखा .....
आया प्यार बनकर .....
गिरा मुझ पर सावन की ....
ठंड़ी - ठंडी फुहार बनकर ...

मनमोहक सूरत देखी .....
उसकी मीठी - मीठी मुस्कान.....
झूम उठी ख़ुशी से जैसे .......
सिमट गया मुठ्ठी में आसमान ....

सोंधी सी खुशबू से उसकी ....
महक गया घर आँगन ......
हौले - हौले से पड़ती बूंदे .....
भीग गया मेरा तन मन......

जाने किसकी नजर लगी .......
मुझसे हुई कौन सी भूल ......
उजड़ गई बगिया सारी .......
मुरझा गये सब फूल .......

भास्कर ने सोख लिया हो ......
जैसे मिट्टी का गीलापन .......
उड़ गया हैं प्यार जीवन से ......
बस रह गया खालीपन ......

हवा से आँधी बनी .....
आँधी से बना तूफान ......
सब कुछ उड़ाकर ले गया ........
हो गया सब वीरान .......

..........@ नेहा धामा " विजेता "