चंदनपुर गांव में बहुत बड़ा मेला लगा था ,यह मेला एक सिद्ध बाबा की याद में हर साल आषाढ़ के महीने में लगता था,कहते हैं वो बाबा इतने बड़े संत थे कि तुलसीदास ने भी उनके आगे अपनी हार मान ली थी।
बिंदु और श्याम दोनों मेला घूम कर लौट रहे थे,दोनों बहुत दिनों बाद एक साथ घर से बाहर निकले थे।
मेले से बिंदु को हर सामान खरीदने का दिल कर रहा था,उसने ढेर सारी चूड़ियां,बिंदी,की खरीददारी की ।चाट टिकिया खाई ,झूले का आनंद लिया ,इसी से दोनों को लौटने में देर हो गई ।
सन्नाटा पैर पसार चुका था।बिंदु को साइकिल पर बैठा श्याम बातें करता घर लौट रहा था।
रास्ते में श्याम ने साइकिल रोक दी।
बिंदु ने कहा _ये क्या शरारत है,जल्दी चलिए , वरना मांजी मुझे बहुत सुनाएंगी।
आप को तो कोई कुछ कहेगा नहीं ,मुझे तो अभी मांजी और दीदी का सामना करना पड़ेगा।
बादल भी घिर आए हैं ,लगता है बारिश जोरों की होने वाली है।
हां,वो तो हैं,इन बरसात के दिनों में ,कभी भी बारिश शुरू हो सकती है_श्याम ने कहा।
अचानक तेज बिजली गरजी , डर कर बिंदु श्याम के सीने से लग गई। बारिश होने लगी , वे भाग कर एक बरगद के पेड़ के नीचे छुप गए ,रिमझिम बारिश दोनों नव जोड़ों को प्रेम रस में भिगोने लगी।
कहते हैं ,आषाढ़ में काम का आवेग बेलगाम हो उठता है ,कालिदास ने भी आषाढ़ के पहले दिन आकाश में उमड़ते में को देख अपनी मेघदूतम की रचना की थी।
यहां तो प्रेमी युगल थे,विरह नहीं संगम हो रहा था उनका इस बारिश में।
दोनों किसी तरह घर पहुंचे, उस समय रात के 10 बज चुके थे।सास, ननद बिंदु को देख बहुत गुस्सा हो रहीं थी।
अभी 10 दिन ब्याह कर नहीं आई ,और रात को वापस आ रही ।
श्याम ने बिंदु का पक्ष लेते हुए कहा_अरे ,अम्मा तुम भी नाहक परेशान हो रही ,हम तो सही समय पर लौट रहे थे ,परंतु बारिश होने लगी।
मुझे क्या,तेरी जोरु है ,मैं तो आज हूं ,कल नहीं_बड़बड़ाती हुई ,बिंदु की सास अपने कमरे में चली गई।
ननद भी मुंह बनाकर चली गई।बिंदु रसोई में गई,अपने और श्याम के लिए खाना निकाल कर कमरे में ले आई।
दोनों ने मिलकर खाना खाया,ऐसा लग रहा था ,खाना तीन लोगों का है।दोनों को भूख लगी थी , चाट,टिक्की मेले में घूमते घूमते ही पच गए थे।
दोनों ने पेट भर कर खाना खाया ,फिर भी एक हिस्सा खाना बच गया था।उन्होंने उसे ढंक कर रख दिया,ये सोचकर कि सुबह गाय को दे दिया जाएगा ,रात काफी हो गई थी ,थकान भी बहुत थी,दोनो गहरी नींद में सो गए।
सुबह जब उठे ,तो देर हो गया

0 टिप्पणियाँ