ये खेल है
खेल चाहे कोई हो
खेल भावना से खेलिये
खेल चाहे कोई हो
स्वास्थ्य के लिये खेलिये
मित्रों संग हिलमिल के
खेलिये भाईचारे को
खेल स्वास्थ्य की कुंजी
आनंद के लिये खेलिये
गर्भ के अंदर से ही
हमें माँ ने यही सिखाया
उंगली पकड़ हमारी
पिता ने भी यही बताया
खेल में अद्भुत आनंद
जीवन मे पाया भी यही
खेल समता भाव को
गुरु ने भी तो यही पढ़ाया
जाने अनजाने ही
मित्रों के संग कितना खेले
लड़े भिड़े गिरे पड़े
लगाते रहे खेलों के मेले
जीते कभी कभी हारे
पर सदा मुस्काते रहे
पल भर को रूठे भी
मन हमारे हुए न मैले
पर टीवी पर होती है
क्यों इतनी करामात
एक रन से जीत जाएं
तो बन जाते सम्राट
धोखे से चूक जाए
गर कोई खिलाड़ी
एक रन से हार जाएं
हो जाते मुर्दाबाद
इनका भाईचारा
खो जाता है कहाँ
मैदान पर पंगा
हो जाता क्यूँ यहाँ
खेल गौड़ होता
मुख्य सिर्फ पैसा
जुआ और सट्टा
हो जाता क्यूँ यहाँ
टिकिट की होती
क्यूँ काला बाजारी
ये टीम जीत रही
या वो टीम है हारी
आज तलक भी सभ्य
हो पाए हम कहाँ
मैच फिक्सिंग के दलाल
बने खिलाड़ी व्यापारी
ये खेल है कैसा
कैसा है ये भरम
हर जगह भ्रष्टाचार
फैल चुका है चरम
आई पी एल का
बेसब्री से इंतज़ार
बोलियां खिलाड़ियों की
लगाते हैं बेशरम
सट्टा बाजार गुलज़ार
कलम कौन चलाएगा
नशे की गोली खिला
खिलाड़ी को खिलाएगा
बौराएगा खेल प्रेमी
सब कुछ जान भी
कौन सी गेंद पर
कौन बिक जायेगा
किसका है दोष
बढ़ाता कौन टी आर पी
खेल को युद्ध की तरह
लेता तो है तू भी
पशुता गर है वहाँ
क्या नहीं तू जिम्मेदार
एक रन की जीत में
आतिशबाजी करता तू भी
अर्चना जैन

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