बारिश और लॉकडाउन
पत्नी जी का मुंह फुला है,
चाय की प्याली जो सुबह-सुबह,
10:00 बज गए अभी तक ना मिली,
पत्नी जी का लाकडाउन में मुंह सूजा,

बारिश ने घर में तूफान मचा दिया,
ऊपर से लॉकडाउन लगा दिया,
मीठे सपनों में सोया  था,
मीठे ख्यालों में खोया था,
बीवी की खडूस आवाज ने जगा दिया
बारिश और लॉकडाउन लगा दिया,
प्रियतमा थोड़ी सी चाय पिला देना,

इतना सा बस कहना था,
बीबी ने चार बात सुना दिया,
खराब हो गया मन सुबह सुबह,
चाय भी नसीब  ना  हुई,
हे भगवान कहां से बारिश और
लॉकडाउन लगा दिया,
टीवी पर क्रिकेट का मैच आ रहा,
मैं किचन में बर्तन धो रहा,
आंखों से आंसुओं की धार बह रही,
कामवाली ने भी नखरे दिखा दिया,
ऑफिस की चाय की याद आ रही ,
बारिश और लाकडाउन ने,
घर मे  तूफान  मचा  रखी,
सोचा था  रविवार  है,
आराम से सोऊंगा,
पत्नी की कर्कश आवाज ने,
दिल को दहला दिया,
हे प्रभु बारिश और लॉकडाउन ने,
घर में बवाल मचा दिया,
दोस्तों के पास फोन लगाया,
तू तो मजे में है यारों,
मैं तो किचन में बैठा सब्जी बना रहा,
दोस्त की मरियम से आवाज आई,
बारिश और लॉकडाउन में,
मैं क्या मजे से  बैठा ,
पत्नी की झल्लाती  हुई आवाज सुनाई पड़ी कब से फोन पर बैठा,
किचन में सब्जी जल रही,
टीवी के पास बैठी में,
जलने कीखुशबू यहां तक आ पड़ी,
हे प्रभु कहां से लाकडाउन और,
बारिश आ पड़ी।..................


सपना कुमारी जहानाबाद बिहार