साजन मेरा रहता है नदिया के पार 
मेले में हुई थी हम दोनो की आंखें चार 

झूल रही थी सखियों संग झूले पर 
दुपट्टा उड़ कर गिर गया था उसके कांधे पर 

दुपट्टे को गले में डाल मुस्कुराते उसने देखा 
हया से नजरें चुराकर मैंने भी किया उसे अनदेखा

झूले से उतरकर सखियों के साथ आगे बढ़ने लगी 
सखियां भी उसके मुखड़े की तारीफ कर सताने लगी 

पास जाकर मैंने उनसे कहा यह दुपट्टा तो मेरा है 
शरारत से भर कर उसने कहा इस पर तो नाम लिखा मेरा है

उसने दुपट्टा हाथ में लिया और सामने रखकर 
यह क्या झट से हाथ पीछे सरका लिया मुझे बढ़ाते देखकर

निगाहों से रोष जताकर चलने लगी मैं वहां से 
आनाकानी कर दुपट्टे को गले में डालकर निकल गया वहां से

बैलगाड़ी में बैठने लगी लौटते समय जब शाम को 
जाते देख वो पास आया और सर पर ओढ़ा चुनर को

चांद की रोशनी में निहारता रहा मुझे अपलक
दिल में कुछ दर्द सा हुआ था मेरे भी उस तलक

दिल अपना वहां छोड़ आई और संग उसका ले आई
जतन करते हैं अब मिलने को हम प्रेमीप्रेमिका तन्हाई तन्हाई

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