मैं कहां गलत हूँ,
मेरा दोष है क्या
किस बात की माँ
दी मुझे सजा......।🙂
🙂 तू बगिया मेरी,
मैं फूल तेरी
तेरा अंग हूँ मैं
मेरी मैया
भैया के कारण क्यों मेरा त्याग किया,
मैं कहां गलत हूं मेरा दोष है क्या
किस बात की माँ दी मुझे सजा....🙂
🙂 मैं दुखी हूँ माँ,
मेरे कारण
तुझे इतनी पीड़ा
सहना पड़ा,
तू खुश थी जब मैं
तेरी कोख में आई
चाह के भी तूने मुझे ना जन्म दिया
मैं कहां गलत हूं मेरा दोष है क्या
किस बात की माँ दी मुझे सजा....।
🙂 भैया की चाह,
थी सबको मैया
तेरा दुख कोई,
ना समझ पाया
मैं कहां गलत हूँ मेरा दोष है क्या
किस बात की माँ दी मुझे सजा....।🙂
🙂आँसू ना बहा,
मत हो तू उदास
मैं आऊंगी माँ
एक दिन तेरे पास,
अगले जन्म का मैं देती हूँ आस
मैं जानती हूँ माँ अपनी मर्जी से
तूने ना ये पाप किया,
किसे कहूँ गलत मैं किसे दोष दूं क्या
किस बात की मुझे मिली ये सजा......।🙂
🙂इस दर्द को जिसने समझ लिया,
वो कभी ना ये अपराध किया
अपनी कविता से "ऋचा" ने सबको
अच्छा सा एक संदेश दिया.....।🙂
(स्वरचित🙏✍ऋचा कर्ण)

0 टिप्पणियाँ