भीख मांग कर खाते-पीते थे
करो ना मैं इस पर भी आफत आ गई,
सड़क पर सोना ही नसीब था अपना तो कोई ठिकाना न था.............
अब तो पुलिस के डंडे पड़ रहे
समझ में ना आ रहा भगवान्

कुछ लोग जो दया दिखाते थे भीख देते थे आज क्यों दुत्कार रहे भगवान्
 कुछ समझ में नहीं आ रहा भगवान्
दो जून की रोटी ठीक से नसीब ना होती थी भगवान् क्या जान लोगे भगवान........
अब तो राहगीर दूर दूर तक नजर ना रहा भगवान........
पहले से गरीब और असहाय थे
अब क्या जान लोगे भगवान्

ना सिर पर छत नसीब है ना खाने का ठिकाना अब क्या जान लोगे भगवान्
अब तो भूखे मर रहे हैं भगवान्
ठंड में सड़क के किनारे ठिठुरते थे
सड़क के किनारे ही सोना था
अब क्या यह भी नसीब नहीं होगा भगवान्..............
भिखारियों पर तो दुखों का पहाड़ टूटा है भगवान हर जगह दुत्कार मिला हे भगवन् ......
मंदिरों स्टेशनों पर हर जगह सन्नाटा ही छाया हम भिखारियों का दुखों का हाल समझो भगवान्
सुना है गरीबों को मुफ्त खाना और राशन दिया जा रहा हम भिखारियों को वहां भी दुत्कार मिल रहा,
कोई हमारी भी सुध लो भगवान्
गरीब और फटेहाल  है भगवान्
कोई हम पर भी दया करो भगवान्
निर्बल और असहाय है भगवान्
सपना कुमारी जहानाबाद बिहार