आप सफाई में कुछ बोलना चाहते हैं आपके ऊपर पीड़िता इल्जाम लगा रही हैं जब उसके साथ जबरदस्ती किया जा रहा था तब आप उस घटना के सामने मौजूद थे। राहुल की आंखों में आंसू झर_झर बहने लगे। उसके गले से अपनी सफाई के लिए एक शब्द भी मुंह से नहीं निकल रहे थे। राहुल की पत्नी कटघरे के पास जाकर राहुल को झकझोरते हुए आप अपनी सफाई पेश करो नहीं तो मैं भी आपको गुनाहगार समझूंगी। आखिर यह लड़की आपके ऊपर इतना बड़ा गुनाह का इल्जाम क्यों लगा रही है। लड़की ने चिल्लाते हुए कहा अगर यह कसूरवार नहीं है तो घटना के वक्त लोग सो रहे थे आधी रात को जंगल में सड़क के पार क्यों गया था क्या कर रहा था वहां इसको किसी ने एक खरोच तक क्यों नहीं किया। राहुल ने जज की तरफ देखते हुए कहा सर मैं बेकसूर हूं मैं गुनाहगार नहीं हूं बल्कि मैं इस लड़की को जान बचाने के लिए गया था। दिव्य कृपा है मेरे ऊपर मुझे भविष्य की बातें के बारे में पता चल जाता है । जब मैं बस में सवार हुआ था तो इस लड़की को देखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उसको पहले से जानता हूं। मुझे इस घटना की पहले से ही जानकारी थी मैं उस समय उसको सचेत करने की कोशिश किया पर यह मेरी बात नहीं मानी। मैंने कहा बस में कुछ ही भीड़ है आगे जंगल शुरू होते हैं आधी रात को सफर करना लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं है। मेरे तरफ तिरछी नजर देखते हुए कहा सर आप अपनी सीट पर बैठ जाइए वैसे आप कौन होते हैं मुझे नसीहत देने वाले। इसके बाद मैं भी चुप हो गया सोचाअनजान लड़की को किस हक से मैंने भी नसीहत दे डाली। मुझे पता था आधी रात को उसके साथ कुछ गलत होगा मुझे बार-बार सपने में और इधर उधर यह लड़की दिखती थी ऐसा लगता था जैसे कोई मदद के लिए पुकार रहा है।अगर गलत हूं मैं तो फिर उसकी जान बचाने जान जोखिम में क्यों डालता। आखिर मैंने ही तो आवाज उठाई थी ,मैंने गुनहगारों को कहा था ऐसे घिनौने काम आप लोग क्यों कर रहे हो एक लड़की के साथ आपको शर्म आनी चाहिए अकेली लड़की के साथ गलत करते हुए। लड़की के पक्ष के वकील ने कहा, सर यह कोर्ट का समय बर्बाद कर रहा है यह बहकी बहकी बातें कर रहा है जो संभव नहीं है आखिर इस गुनाह में शामिल था। बाकी गुनहगारों के साथ राहुल को जेल की सजा हुई। राहुल कटघरे में दहाड़े मार कर रोने लगा और उसने कहा आखिर हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई सभी को यह बात एक काल्पनिक लगेगी। आखिर मुझे उस अनजान लड़की से क्या रिश्ता था आज के जमाने में कोई भी मदद करने नहीं आता पता नहीं मेरी कैसे मति मारी गई थी जो मैं सपनों के चक्कर में पड़कर अपनी जान पर खेलकर इस लड़की की जान बचाई। तभी गुनाहगारो में से एक व्यक्ति ने कहा मैं इस लड़के को नहीं जानता और हम लोगों ने कैसे इसको छोड़ दिया पता नहीं पर कुछ दिव्य कृपा तो जरूर हुआ होगा नहीं तो हम लोग अपराधी हैं अगर यह नहीं आता तो इस लड़की का जान चली जाती। उस लड़की की आंखों में एक आश्चर्य हुआ उसने कहा ऐसे कैसे संभव है? बस में इक्के दुक्के और सवारी थे किसी ने कुछ भी नहीं बोला। राहुल की आंखों और चेहरे से साफ पता चल रहा था वह निर्दोष है पर शक के आधार पर उसे भी सजा हुई। मन ही मन राहुल हे भगवान कैसे फंसाया तूने आखिर मैंने गलती क्या की थी किसी लड़की की इज्जत बचाना गुनाह है क्या? हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई आखिर मैं इस लफड़े में क्यों पड़ा मुझे क्या जरूरत थी। राहुल पत्नी की तरफ देखते हुए मुझे तो जेल की सजा हो गई पर तुम मेरी बातों को विश्वास करो मैं निर्दोष हूं ।..........
सपना कुमारी जहानाबाद बिहार

0 टिप्पणियाँ