सावन सुहाना मौसम
आया
बारिश के फुहारों के साथ
तन मन भिगोता मौसम
आया
कुहू की कुहू बोली ने
मन मोहा
पपीहे ने तान सुनाया
बिखरी रंग बिरंगी छटा
चहुँ ओर
तितलियों ने पंख पसारे
भवरों ने अलाप लगाया
धरा पर मोतियाँ बिखरी हो जैसे
सरगम सुना रही हो जैसे
मिट्टी की सोंधी खुशबू
समाहित हो रही हो जैसे
बारिश ने सुनाई सरगोशी अपनी
मीठी हवा ने दी है दस्तक
सावन के झूले में मन समाया
कृष्ण ने राधा को बुलाया
सखियों संग राधा को झुलाया
सृष्टि का मन लुभाया
काले काले बदरा आए
चपला ने चमक रौशनी बिखेरी
कजरी तीज की बेला आई
हरी हरी चूड़ियों से
सज गई कलाइयाँ
खेत खलिहान लहलहाए
हरियाली ने पैर पसारे
गुनगुनाता
तन मन भिगोता सावन आया
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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