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सात सुरों के सरगम से
भिन्न-भिन्न ,भाव भंगिमाओं को
दर्शाती , मनमोहक चेहरे पे
प्रकट करे जो,अपनी भावनाओं को
विभिन्न हस्तकलाओं से
घुंघरुओं के ,मधुर स्वर से
चंचल पैरों की थिरकन
मंत्रमुग्ध करें ,नृत्य कलाओं से
प्रदर्शित करें,अपनी कुशलता
कला में निपुण ,वो नृत्यांगना
आकर्षित करें, मोहिनी स्वरुप से
नृत्य कला में, स्वयं की साधना
वह तो है , एक पारंगत "नृत्यांगना"
नृत्यकला में निपुण वह "नृत्यांगना"
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मनीषा भुआर्य ठाकुर

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