तेरी आंखें मुझे बुलाती हैं, 
मां सच में बहुत रुलाती हैं।
 जब छोड़ तुझे मैं आया था
 अपने सपनों की खातिर,
 जब भूल भला मैं आया था
 तुझको अपनों की खातिर , 
,तब ख्याल मुझे ना आया था 
तू भी अपनों में शामिल है 
तू भी तो इंसान है मां मेरी 
तुझ में भी तो होता दिल है
 वह भूली बिसरी बातें  आज
 याद बहुत फिर आती हैं ।
तेरी आंखें मुझे बुलाती है 
मां सच में बहुत रुलाती हैं।
 तूने सृवस्व गवाया अपना
  मुझको पालकर बड़ा किया,
 मैं नालायक निकला मां 
तुझको दिल से ही हटा दिया ।
पर उम्र के इस मोड़ पर मां
 वह बातें सारी रात जगाती है ।
तेरी आंखें मुझे बुलाती है 
मां सच में बहुत रुलाती हैं ।
आ लौट आ मां फिर से एक बार
 दर्शन कर लूं तेरे एक बार ,
अंतर्मन हर पल धिक्कारता है
 हर कोना मुझ पर दहाड़ता है ।
कब कैसे भूल गया तुझको ,
यह यादें बहुत सताती हैं ।
तेरी आंखें मुझे बुलाती हैं 
मां सच में बहुत रुलाती है।
स्वरचित 
सीमा कौशल 
यमुनानगर हरियाणा