इंसान इस दुनिया में जन्म लेकर आता है,तब वह नहीं जानता, कि वह अमीर है या गरीब।
इसका परिचय तो उसे यह दुनिया कराती है।जहां पर उसे यह बताया जाता है कि यदि उसके पास पैसा है। महंगे कपड़े, गाड़ी बंगला सारे ऐसोआराम की चीजें हैं। तो वह अमीर है,और यदि यह सब नहीं है तो गरीब इंसान है। अमीर,गरीब का नामकरण तो दुनिया वाले ही करते हैं। आज के वर्तमान परिवेश में देखा जाए तो महलों ,बड़े-बड़े बंगलो में रहने वाले,रुदबे पैसे वाले अमीर लोग हैं,और सामान्य से घर, झोपड़ी में रहने वाले लोग गरीब कहला दिए जाते हैं।
वास्तव में गरीब तो वह है, जो सारे सुख सुविधाओं के बावजूद खुशियों भरा जीवन जी नहीं पाते। ऐसे अमीर लोगों के लिए पैसा ही सब कुछ होता है, ना परिवार के साथ समय बिता पाते हैं,ना चैन की नींद सो पाते हैं। लेकिन उसी जगह एक झोपड़ी में रहने वाला दो सूखी रोटी खाकर भी अपने परिवार के साथ सुख पूर्वक खुशी के साथ रहता है,और चैन की नींद सोता है। क्योंकि पसीना बहा कर वह मेहनत भी तो करता है। कई बार स्थितियां पलट जाती है, निम्न सुख सुविधाओं में रहने वाले भी,अपनी योग्यता से जीवन में बहुत कुछ प्राप्त कर सफल हो जाते हैं। ऐसे इंसान जो विषम परिस्थितियों से गुजर कर सफलता प्राप्त करते हैं।उनमें अहंकार की भावना कदापि नहीं होती,क्योंकि वह वास्तविक धरातल से जुड़े इंसान होते हैं।
आज के जमाने में कुछ अमीर इंसानों के माता-पिता भी आपको वृद्धआश्रम में नजर आएंगे। पैसा उन्हें आधुनिकता की जिंदगी तो दे देता हैं। लेकिन अच्छे संस्कार नहीं दे पाता। अब आप ही बताइए गरीब शब्द हम किसके लिए उपयोग करें। सब कुछ होते हुए भी सच्चा सुख,संतुष्टि भरा जीवन और चैन की नींद जो सो नहीं पाता,क्या वह गरीब नहीं है??पैसा सब कुछ खरीद सकता है,लेकिन आत्मिक संतुष्टि(खुशियां) कभी नहीं।
मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)

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