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ये मन भावुक हो जाता है क्यू 
कुछ सुलझा सा कुछ अनसुलझा
एक एहसास दिलाता है क्यू
यह मन भावुक हो जाता है क्यू 

हर मन की एक व्यथा है
थोड़ी कच्ची सी थोड़ी पक्की सी एक कथा है 
बन जाती है एक कहानी 
इसी का नाम ही तो है जिंदगानी 

यह मन क्यों इतना नादान है 
यह खुद से ही अनजान है 
खींच लेता है जब कोई अपनी और
बन जाती है उसी से विश्वास की डोर

यह मन क्यों होता है चंचल 
एक हवा के झोंके से हो जाती है हलचल
बिन माझी के पतवार सा है 
सागर में उठती लहरों के अंबार सा है 

उठती है लहरें अनगिनत आहट नहीं आती है 
एक हलचल सी उठती है फिर शांत हो जाती है
यह मन बड़ा भोला है खुद संभल जाता है
अपनी व्यथा किसी को नहीं सुनाता है 

कुछ सुलझा कुछ अनसुलझा
एक एहसास दिलाता है
यह मन क्यों भावुक हो जाता है

संगीता वर्मा ✍️✍️