जो हो गया उसे भूल जा 
जो सामने है उसका ख्याल कर 
जिसके जवाब का कोई अर्थ नहीं 
ऐसा न कोई सवाल कर

अपने मसले सुलझा लो तुम 
खुद को न उलझा लो तुम 
बेवजह न कोई  बवाल कर 
जो हो गया उसे भूल जा 
जो सामने है उसका ख्याल कर

यूँ बेकार मे न बात बढ़ा 
हो सके तो हाँथ बढ़ा 
नेकी के सांचे मे ढाल कर 
जो हो गया उसे भूल जा 
जो सामने है उसका ख्याल कर
आपका मुकेश लखनवी