गतांक    से     आगे 👇


राहुल की माॅं के मन में खिन्नता उभरने लगी जिसका प्रभाव उनके चेहरे पर स्पष्ट झलकने लगा था । मेरा बेटा हैं भी बहुत संवेदनशील .. तभी तो सभी इसे कोमल मन वाला आदमी कहते है । फंसा लिया सभी ने मेरे बेटे को और  मेरे खुद के बेटे ने कर्तव्यों  के निर्वहन के नाम पर अपने आप को ही सूली पर चढ़ा लिया । 

राहुल की माॅं ने आग्नेय दृष्टि से अपने बेटे को देखा और तेज कदमों से बाहर की तरफ भागी । पीछे - पीछे राहुल के पिता भी राहुल को बाहर आने का इशारा कर निकल पड़े । 


माॅं की आग्नेय दृष्टि और तेज कदमों की आहट ने राहुल को इतना तों समझा दिया था कि आने वाले कुछ घंटे उस पर कितने भारी होने वाले हैं । 


मैं   सेहरा बांध    के आऊंगा    मेरा   वादा   है ....... 
तेरी   माॅंग    सजाऊंगा    मेरा   वादा    है ........ 
मृणाल के कानों के पास गाते हुए राहुल ने अपनी होने वाली पत्नी से यहाॅं से जाने की इजाजत माॅंगी । 

मैं   आपका   इंतजार    करूंगी ... .... उम्मीद    के विपरित मृणाल के होंठों से अपने लिए ऐसा सुनना 
किसी करिश्में से कम ना था । 

इन एक हफ्तों में ही दो अनजान ऑंखो ने एक-दूसरे के दिल की बातों को पढ़ना जान लिया था । राहुल ने उस दिन मृणाल की ऑंखो में उदासी की जगह अपने लिए विश्वास की   एक  डोर को अंकुरित होते हुए देखा । उसने उसी क्षण अपने आप से वादा किया कि मैं इस विश्वास की डोर को टूटने नही दूंगा बल्कि अपने प्रेम से इसको मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोडूंगा ..... 


गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठते ही राहुल ने आने वाले घंटों की जों कल्पना की थी अब अपने विकराल रूप  के साथ उसके समक्ष  दीप्तिमय ( प्रकट ) होने लगी थी । 


जब इंसान भय के कारण को रोकने का प्रयत्न करता है तों वही भय उसके व्यवहार में स्पष्ट रूप से व्यक्त होने लगता है । राहुल की माॅं भी अपने बेटे को खोने के भय को रोक नहीं पा रही थी जो उसके व्यवहार और कड़वी बोली के माध्यम से व्यक्त हो रहा था । 


गुस्से के वक्त मौन से बड़ा कोई अस्त्र नही । राहुल ने भी   परिस्थिति  के  अनुरूप  अभी  के  लिए मौन को ही अपना अस्त्र बना लिया था । एक पिता को जहाॅं अपने फौजी बेटे की सोच पर गर्व महसूस हो रहा था वहीं पर एक माॅं अपने बेटे को खोने के भय से जल बिन मछली की भाॅंति तड़प रही थी । 

मान जाओ  ना माॅं ..... पापा ! माॅं से कहो ना कि वह मान जाएं ... राहुल के पापा ने इशारों में अपने हाथ खड़े कर बेटे को बता दिया कि वह उसकी मदद फिलहाल तों नहीं कर सकते । 


अपने बेटे की शादी  में एक माॅं  के क्या  - क्या अरमान होते हैं  यह  मैं अच्छी तरह  जानता  हूॅं ... 
आप ही तों कह रही थी कि मुझे अब शादी कर लेनी चाहिए और देखिए माॅं ! परसों मेरी शादी है । आपके जों भी अरमान है वह इन दो दिनों में आप पूरी कर सकती है ... कहते हुए राहुल अपनी माॅं के चरणों के पास बैठ गया । 


हाॅं ! तेरी यह बात बिल्कुल सही है कि मैंने ही तुमसे कहा था कि तुम्हें अब शादी कर लेनी चाहिए थी । तेरी शादी को लेकर मेरे बड़े - बड़े अरमान थे जिन्हें तुमने आज बिखेर कर रख दिए । कर्तव्यों को पूरा करने की तुम्हारी इसी चाहत की वजह से मेरे सारे सपने धरे के धरे रह गए .... राहुल    की    माॅं    के सिसकियों भरे शब्द ... राहुल  को असीम ( बेहद ) पीड़ा  पहुॅंचा  रहें थे । उसने सपनों में भी कभी नहीं सोचा था कि वह अपनी माॅं के सिसकियों की वजह बनेगा । 


राहुल की माॅं ने भर्राए हुए  में कहा - " मैंने सोचा था मैं अपने बेटे के लिए  दुनिया की सबसे सुंदर लड़की ढूंढ़ कर लाऊंगी । मैं गलत थी मुझे तों मालूम ही नहीं था कि  अपने माता-पिता की पसंद आजकल के बच्चों के लिए नापसंद बनती जा रही है । मैं यह भी एक पल के लिए मान लेती हूॅं लेकिन अपने से बड़ी उम्र की लड़की से शादी " .... मैं  यह बर्दाश्त नहीं कर सकती । 

माॅं ! आप तों पढ़ी - लिखी है बेशक आप जानती है कि लड़कियां अब लड़कों के बराबर हैं । कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं जिसमें इन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज ना कराई हों । हमारे पुरूष प्रधान समाज के लोगों की सोच लड़कियों और औरतों के बराबरी की बड़ी - बड़ी बातें भले ही पूरे जोर - शोर से कर लें लेकिन जब बराबरी देने का वक्त आता है तों बराबरी देने में बिल्कुल भी यकीन नहीं रखता है । आप एक औरत होकर भी पुरुष प्रधान सोच को बदलने की बजाय उसे बढ़ावा देने में लगी है ... राहुल ने माॅं की ऑंखो में ऑंखें डाल कर कहा । 

माॅं की तरफ से कोई उत्तर न पाकर राहुल ने पुनः कहना शुरू किया - माॅं  ! लड़कियों  की शादी जब उससे बड़े लड़को के साथ हों सकती हैं तों लड़कों की शादी उससे बड़ी लड़कियों के साथ क्यों नहीं हो सकती ?? मैंने पढ़ा भी है ... हमारे देश में बहुत ऐसे लोग हुए हैं जिनकी शादी बड़ी लड़कियों से हुई है और उनका दाम्पत्य जीवन भी सुखमय रहा है । 


मुझे तुमसे कोई बहस नहीं करनी । तुम्हारी जों भी इच्छा है , जों भी सोच है उसे अपना कर्तव्य समझ करते रहो । मुझे तुमसे जों भी कहना था मैंने कह दिया बाकी तुम खुद समझदार हो .. भली-भांति जानते हों कि तुम्हें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए ? माॅं के द्वारा कहें शब्दों की धार इतनी पैनी और घातक थी कि राहुल का सीना छलनी हों गया । 


आज  मेरे बेटे की  हल्दी और मेहंदी हैं और मेरा बेटा है कि अभी तक सोया हुआ है .. माॅं के मुख से निकले शब्दों ने राहुल के छलनी हुए सीने पर मरहम का काम किया । वह अपनी माॅं से लिपट गया । 


मैं जानता था आप मुझे मेरे कर्तव्यपथ से विमुख नहीं होनी देंगी । आप तों हमेशा से मेरा सबल बनी है । मेरे किए गए   वादों  का मान  रखने  के लिए  आपका 
बहुत बहुत धन्यवाद माॅं .. कहते हुए राहुल अपनी माॅं से पुनः लिपट गया । 

थोड़ा धन्यवाद तों मेरा भी बनता है और साथ ही तुम्हारे भैया - भाभी का भी । हम सबने मिलकर तुम्हारी माॅं को मनाया हैं ... कहते हुए राहुल के पापा और भैया - भाभी ने मुस्कराते हुए कमरे में प्रवेश किया । 


क्रमशः 

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗