जुनून है किसी को अपनाने का
जी जान से अपना बनाने का
अपना खून भी अपना नही होता
तभी अनाथालय आबाद होता
क्यू न किसी को अपनाया जाए
दिल से उसे अपना बनाया जाय
हो सके तो उसकी जिंदगी को सजाया जाए
ए दोस्त आते सब जाते सब
खाते सब
क्यू न किसी को खिलाया जाय
माँ पिता बहन भाई का प्यार दिलाया जाय
एक जुनून हो दिल मे
मानवता का पाठ पढ़ाया जाए
संध्या पंवार

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