जिस इश्क का ताजमहल खड़ा हो फरेब की नी पर।
मेरा दिल डरता है ऐसी मोहब्बत से।

जो हजार वादे करे फिर बे वफ़ा हो जाए,
उम्र भर साथ चलने का कहकर ,
दो कदमो का हमकदम बनकर जुदा हो जाए ,
मेरा दिल डरता है ऐसी चाहत से।

जो करते हैं लम्बी उम्र की दुआ मेरी,
और कहते हैं तेरी कसम 
अपनी बातों से न दिल तेरा दुखाएंगे कभी,
अगले ही पल वादे से मुकर जाते हैं हम डरते हैं,
ऐसे मुहाफिज से।

जो दिल मे आँखों से उतर आते हैं,
रूहानी इश्क उनका अक्सर यह दावा करते हैं,
पता भी नही चलता कितनी मासूमियत से राह बदलते हैं,
हम डरते हैं ऐसे शरीफों की शराफत से।

हम तन्हां पसन्द ही अच्छे,
  चन्द पल उधार की खुशियों से,
अकेले रहने में कोई बुराई नही,
हमें डर लगता है बुरी शोहबत में रहने से।

हमें खामोशियों से मोहब्बत है,
शोर शराबे से लगती दहसत है,
हम गुमनाम ही खुश हैं अंजुम,
हमें डर लगता बदनामियों से मिली शोहरत से।

अन्जू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।